वाराणसी की दालमंडी में सड़क चौड़ीकरण को लेकर चल रहे विवाद ने राजनीतिक पारा अचानक चढ़ा दिया है, क्योंकि इस बार अखिलेश यादव ने प्रेस वार्ता में जिस तेवर के साथ योगी सरकार और अफसरों पर हमला बोला, उसने सभी को चौंका दिया. सपा अध्यक्ष ने साफ कहा ये विकास नहीं, राजनीतिक तोड़फोड़ है. उनका ये भी आरोप था कि सरकार अधिकारियों के जरिए कारोबारियों पर दबाव डाल रही है और दुकानों को बेवजह तोड़ा जा रहा है. अखिलेश की चेतावनी दालमंडी वालों को मत दबाइए, सब रिकॉर्ड में है… समय आने पर हिसाब होग ने पूरे मामले को सियासी तूफान बना दिया.
अखिलेश की सख्त चेतावनी
अखिलेश यादव का अंदाज इस बार पूरी तरह अलग था. जानकारों का कहना है कि वे सिर्फ बयान देने नहीं आए थे, बल्कि दालमंडी के मुद्दे को अपनी बड़ी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बना चुके हैं. मंच से उन्होंने अधिकारियों की ओर इशारा करते हुए कहा जो किया जा रहा है, सब नोट किया जा रहा है, जनता को तकलीफ दी तो चुनाव में परिणाम भी भुगतना पड़ेगा. उनकी इस चेतावनी ने व्यापारियों में जोश भर दिया, जबकि प्रशासन पर दबाव बढ़ गया.
विकास कार्यों पर भी साधा निशाना
अखिलेश यहीं नहीं रुके. उन्होंने योगी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लखनऊ का मॉल बेच दिया गया, वाराणसी की मेट्रो रोकी गई, वरुणा रिवरफ्रंट को आगे नहीं बढ़ने दिया गया. उनका कहना था कि सड़क चौड़ीकरण के नाम पर दालमंडी के दुकानदारों की दशकों पुरानी कमाई और रोज़ी-रोटी पर बुलडोजर चल रहा है. एक दुकान बनाने में सालों लगते हैं और सरकार पलभर में उसे तोड़ने पर तुली है यह बयान सुनते ही व्यापारियों ने तालियां बजा दीं. अखिलेश ने दालमंडी को सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि काशी की पुरानी विरासत बताया और दावा किया कि इस क्षेत्र में कार्रवाई इसलिए हो रही है क्योंकि बीजेपी यहां चुनाव नहीं जीत पाती.
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क्या चुनाव से पहले बड़ा मुद्दा बन जाएगा दालमंडी?
दालमंडी विवाद पिछले कई दिनों से सुर्खियों में है. कई ऐसी दुकानें हैं जो तीन-चार पीढ़ियों से चल रही हैं और अचानक उनका ध्वस्तीकरण शुरू होने से व्यापारी बेहद परेशान हैं. वे कई बार प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन असर नहीं हुआ। अखिलेश ने कहा कि इस इलाके की जमीन पर कुछ शक्तियों की नजर है और अधिकारियों को आगे कर सियासी योजना बनाई जा रही है. जानकार मानते हैं कि व्यापारियों का बढ़ता आक्रोश और विपक्ष की सक्रियता आने वाले चुनावों में बड़ा असर डाल सकती है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार पीछे हटती है या विवाद और गहराता है.