उत्तर प्रदेश की सियासत में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सावन के पहले सोमवार 14 जुलाई को काशी के बाबा विश्वनाथ मंदिर में विशेष जलाभिषेक करने का ऐलान किया है. इस कदम को उनका ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ एजेंडा बताते हुए विश्लेषक इसे बीजेपी की ‘हिंदुत्व राजनीति’ का जवाब और अपनी पारंपरिक ‘मुस्लिम‑यादव’ छवि से बाहर निकलने की कोशिश की रणनीति मान रहे हैं. उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि देश भर से करीब 50 हजार “यादव बंधु” भी जलाभिषेक में उनके साथ शामिल होंगे, जो लंबे समय से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है.
सदियों पुरानी प्रथा निभाएंगे अखिलेश
सावन के पहले सोमवार को यदुवंशियों द्वारा काशी में बाबा विश्वनाथ के दरबार में सांस्कृतिक रूप से अमिट छवि वाले जलाभिषेक की परंपरा सैकड़ों सालों से चली आ रही है. यह आयोजन 1932 में तेजू सरदार द्वारा शुरू किया गया था, जब सूखे से तबाही झेल रहे क्षेत्र में यदुवंशी समुदाय के लोगों ने गंगा से जल लाकर केदारघाट से शुरुआत कर महत्वपूर्ण शिव मंदिरों—जैसे गौरी-केदारेश्वर, तिलभांडेश्वर, दशाश्वमेध घाट और अंततः बाबा विश्वनाथ पर जलाभिषेक किया था. धीरे-धीरे यह लोकप्रथा चल बनी.
इस पारंपरिक यात्रा में इस बार 14 जुलाई को लगभग 50,000 यादव बंधु हिस्सा लेने काशी पहुंचेंगे, जिसमें सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी शामिल होंगे. उन्हें चंद्रवंशी गोप सेवा समिति ने आमंत्रित किया, जिसने इस आयोजन की व्यवस्था की है. आयोजन का प्रारंभ 1932 से लेकर आज तक चलता आ रहा है और अब यह सावन में महत्त्वपूर्ण सामाजिक-सांस्कृतिक संदेश के साथ-साथ राजनीतिक छवि बनाने का मंच भी बन चुका है.
हिंदुओं की ओर बढ़ता कदम
सावन के पहले सोमवार का पवित्र महत्व भगवान शिव की कृपादृष्टि को आकर्षित करता है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर वर्ष गोरखनाथ मंदिर में रुद्राभिषेक करते हैं. वहीं इस बार सपा प्रमुख द्वारा काशी में जलाभिषेक की पहल राजनीतिक संदेश भी देती नजर आ रही है. यह कदम उनके लिए दोहरी भूमिका निभा सकता है. एक ओर पार्टी की ‘मुस्लिम‑परस्त’ छवि से निकलने की छवि पेश करना, तो दूसरी ओर ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ के माध्यम से हिन्दू मतदाताओं को आकर्षित करना.
क्या कहते हैं विश्लेषक
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह दांव दोधारी तलवार की तरह है. एक तरफ सपा के लिए हिंदू वोटरों को आकर्षित करने में मदद मिल सकती है, लेकिन दूसरी तरफ मुस्लिम वोट बैंक का नाराज होना एक सम्भावित खतरा है.
सपा ने पिछले चुनावों में मुस्लिम‑यादव समर्थन को आधार बनाकर सत्ता अर्जित की थी. लेकिन अब सपा के लिए पीडीए फॉर्मूला सहित कई रणनीतियों के बावजूद बीजेपी की पकड़ से निकलना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है.
बहरहाल अखिलेश का सावन के पहले बाबा विश्वनाथ के दरबार में जलाभिषेक करना सिर्फ आस्था नहीं है, बल्कि सियासी रूप में एक मजबूत संदेश भी है. जनता के बीच वह धार्मिक समावेशिता के साथ सांप्रदायिक संतुलन बनाना चाह रहे हैं, पर इसका सियासी और चुनावी असर आगे ही तय करेगा कि यह कितनी गहराई से असर करती है.