उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 अभी दूर है, लेकिन सियासी जमीन पर हलचल अभी से बढ़ने लगी है। समाजवादी पार्टी ने अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। लोकसभा चुनाव 2024 में बेहतर प्रदर्शन के बाद पार्टी का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब लक्ष्य सीधा है, 2027 में सत्ता की वापसी।
डिजिटल रणनीति पर जोर
सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव ने चुनावी अभियान को पेशेवर तरीके से चलाने के लिए एक रणनीतिक टीम को जिम्मेदारी सौंपी है। बताया जा रहा है कि यह टीम राज्य स्तर से लेकर बूथ स्तर तक काम करेगी। खास फोकस सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रहेगा। पार्टी चाहती है कि संदेश साफ और एक जैसा जाए।
मीटिंग में क्या हुआ तय
जानकारी के अनुसार दिल्ली में इस रणनीति को लेकर बैठक हुई थी। विधायकों और पदाधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि व्यक्तिगत बयानबाजी से बचें। विरोधियों पर हमला करने से ज्यादा अपने काम और मुद्दों को सामने रखा जाए। साथ ही एआई या फर्जी संदेशों से सावधान रहने को भी कहा गया है।
बीजेपी के लिए चुनौती?
उत्तर प्रदेश में बीजेपी का मजबूत आईटी नेटवर्क माना जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सपा की नई डिजिटल रणनीति उसे टक्कर दे पाएगी। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि सोशल मीडिया अब चुनाव का बड़ा हथियार बन चुका है। अगर माहौल बनाया जाए तो उसका असर जमीन पर भी दिखता है।
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पिछले चुनावों का आंकड़ा
सपा ने 2012 में 224 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। 2017 में उसे बड़ा नुकसान हुआ, जबकि 2022 में बीजेपी ने सत्ता बरकरार रखी। हालांकि सपा का वोट प्रतिशत बढ़कर 32 फीसदी तक पहुंचा, जिससे साफ हुआ कि पार्टी की पकड़ खत्म नहीं हुई है। यही वजह है कि इस बार रणनीति ज्यादा सधी हुई दिख रही है।
परिवार में एकजुटता का संदेश
सपा खेमे में यह भी चर्चा है कि चाचा शिवपाल यादव और अखिलेश यादव साथ मिलकर काम करेंगे। पार्टी के भीतर एकजुटता दिखाने की कोशिश की जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि यह नई चाल 2027 में कितना असर दिखाती है। फिलहाल यूपी की राजनीति में हलचल तेज हो चुकी है और मुकाबला दिलचस्प होने के संकेत मिल रहे हैं।