उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचलें तेज़ होने लगी हैं. समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनावी बिगुल फूंकते हुए अल्पसंख्यक मतदाताओं को साधने की दिशा में बड़ा संकेत दिया है. सोमवार, 16 जून को लखनऊ में सपा अल्पसंख्यक मोर्चा की बैठक के बाद प्रेस वार्ता में उन्होंने वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाया और कहा कि पार्टी इस मामले को गंभीरता से ले रही है.
वोटर लिस्ट पर सपा की नजर
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने कहा कि "हमारी पार्टी ने तय किया है कि वोटर लिस्ट को ठीक कराने का काम प्राथमिकता पर किया जाएगा. भाजपा ने जिन फर्जी वोटरों के नाम जुड़वाए हैं, उनके खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई जाएगी." उन्होंने आगे कहा कि संगठन के कार्यकर्ता अल्पसंख्यक समाज के लोगों को जागरूक करेंगे कि वो अपने नाम मतदाता सूची में जांचें और ज़रूरत पड़ने पर सही कराएं.
राहुल के नक्शेकदम पर अखिलेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव यह कदम कांग्रेस नेता राहुल गांधी की रणनीति से प्रेरित होकर उठा रहे हैं, जो हाल ही में देशभर में वोटर लिस्ट में अनियमितताओं को लेकर मुखर हुए थे. राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर प्रमुख राष्ट्रीय अखबारों में लेख भी लिखा था, जिसने देश की सियासत में हलचल मचा दी थी.
मुस्लिमों को सधा हुआ संदेश
इस कदम के ज़रिए सपा प्रमुख ने मुस्लिम मतदाताओं को चुनाव से पहले अलर्ट रहने का परोक्ष संदेश देने की कोशिश की है. उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी कार्यकर्ता हर बूथ स्तर पर यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी मतदाता का नाम जानबूझकर लिस्ट से न हटाया जाए.
बता दें कि बीते साल उत्तर प्रदेश की 9 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए थे, जहां कई बार ऐसे मामले सामने आए कि मुस्लिम मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से गायब थे या उन्हें मतदान से रोका गया. सपा इसी मुद्दे को हवा देकर अपने कोर वोट बैंक को एकजुट करने की कोशिश कर रही है.
मेलों पर रोक को बताया भाईचारे पर हमला
प्रेस वार्ता में अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि बहराइच और बाराबंकी में परंपरागत मेलों को रोका जा रहा है, जो आपसी भाईचारे और सद्भाव का प्रतीक होते थे.
भाईचारे के खिलाफ भाजपा
अखिलेश यादव ने कहा,“भाजपा सरकार भाईचारे और खुशियों के खिलाफ है. जो मेले सदियों से लगते आ रहे हैं, वो सिर्फ कारोबार नहीं, बल्कि मेल-जोल और एकता के प्रतीक हैं. इन मेलों के माध्यम से गरीब लोग अपनी रोज़ी-रोटी कमाते थे, लेकिन सरकार ने इन्हें भी बंद करवा दिया” .
उन्होंने यह भी जोड़ा कि भाजपा जानबूझकर ऐसे आयोजनों को निशाना बना रही है जो सामाजिक एकता को बढ़ावा देते हैं, क्योंकि पार्टी का मकसद लोगों को 'बांट कर राजनीति करना' है.