
फिर एक बार अखिलेश यादव ने समाजवादी अंदाज में ऐसा काम किया है, जिसने देश की सियासत को हिलाकर रख दिया, क्योंकि इस बार न सिर्फ अखिलेश ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया बल्कि अपने आक्रामक तेवर से सबका ध्यान खींचा है. जिसने चाचा शिवपाल का भी दिल जीत लिया है. दरअसल वोट चोरी के आरोप और बिहार SIR को लेकर विपक्षी दलों ने संसद से भारत के चुनाव आयोग तक पैदल मार्च का ऐलान किया था. मार्च में लोकसभा और राज्यसभा के 300 से ज्यादा सांसद शामिल हुए, जिनमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, डीएमके समेत तमाम दलों के दिग्गज नेता कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे.
खिलाड़ी की तरह बैरिकेड फांदे अखिलेश
सबसे आगे राहुल गांधी, बगल में विपक्ष के बड़े चेहरे, और पीछे-पीछे नारे लगाते सैकड़ों कार्यकर्ता लेकिन दिल्ली पुलिस के बैरिकेड इस बार सिर्फ लोहे के नहीं थे, बल्कि सियासी जिद और सरकार की सख्ती से भी बने थे. जैसे ही जुलूस संसद से निकलकर चुनाव आयोग की तरफ बढ़ा, पुलिस ने बीच रास्ते में रोक दिया. कारण बताया गया प्रदर्शन के लिए कोई अनुमति नहीं है वहीं पुलिस के रोके जाने पर माहौल गरम हो गया. इसी बीच वो पल आया जिसने पूरे दिन की सुर्खियां चुरा लीं. क्योंकि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, पुलिस के बैरिकेड के सामने पहुंचे कुछ पल खड़े रहेऔर फिर अचानक एक खिलाड़ी की तरह छलांग मारकर बैरिकेड फांद गए. ये दृश्य देख हर कोई हैरान रह गए, क्योंकि पीछे से नेता चिल्ला रहे थे, पुलिस हैरान थी, और कैमरे वाले इस मौके को कैद करने के लिए दौड़ पड़े. एक पल में अखिलेश का ये वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं.
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अखिलेश की तस्वीर देख चाचा शिवपाल गदगद
जानकारों की मानें तो ये सिर्फ नारों का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि आने वाले चुनावों के लिए विपक्ष का माहौल बनाने का मंच भी था. माहौल में गर्मजोशी थी, थोड़ी-सी तकरार थी, और बहुत सारी कैमरों की फ्लैश लाइट्स थीं. अखिलेश यादव के कूदने वाली तस्वीर इस पूरे विरोध का चेहरा बन गई. इस तस्वीर को अखिलेश के चाचा शिवपाल सिंह यादव ने भी पोस्ट किया और लिखा कि
संघर्ष की पहचान रुकना नहीं, टकराना है!
जब हक की आवाज रोकने को बैरिकेड खड़े हों,
तो समाजवादी पीछे नहीं हटते बैरिकेड तोड़ते हैं, कूदते हैं, ललकारते हैं!
आज अखिलेश यादव जी की छलांग सिर्फ लोहे पर नहीं थी,
ये छलांग थी लोकतंत्र बचाने की कसम पर!
इधर चाचा शिवपाल ने कहा उधर सोशल मीडिया पर लोग कहने लगे ये सिर्फ एक बैरिकेड नहीं, बल्कि सत्ता की दीवार थी, जिसे अखिलेश ने छलांग लगाकर पार कर दिया राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ऐसे प्रतीकात्मक पलों का असर चुनावी राजनीति में लंबा रहता है. विपक्ष के समर्थकों के बीच ये तस्वीर विरोध के साहस का प्रतीक बन गई, तो सत्ता समर्थकों ने इसे ड्रामा बताया है. चाहे इसे सियासी स्टंट कहें या लोकतंत्र की लड़ाई का प्रतीक इतना तय है कि सोमवार का दिन अखिलेश की छलांग के नाम रहा. संसद से चुनाव आयोग तक का रास्ता भले ही पुलिस ने रोक दिया हो, लेकिन अखिलेश ने जिस अंदाज में बैरिकेड फांदा, उसने इस विरोध को एक ऐसी विजुअल स्टोरी में बदल दिया. अब वोट चोरी से ज्यादा, अखिलेश की छलांग ने देश की सियासत में हलचल मचा दी है.