Akhilesh Yadav on Delimitation Bill: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने परिसीमन बिल को लेकर अपनी तीन प्रमुख मांगें सामने रखी हैं। उनके सोशल मीडिया पोस्ट के बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि यदि सरकार इन मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाती है तो सपा इस विधेयक का समर्थन करने पर विचार कर सकती है। हालांकि, अखिलेश यादव ने अपने बयान में सीधे तौर पर समर्थन की घोषणा नहीं की है।
सोशल मीडिया पोस्ट में रखीं तीन मांगें
अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि परिसीमन के साथ उच्च सदन में भी सीटों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने महिला आरक्षण में पिछड़े वर्गों (पीडीए) की महिलाओं और अल्पसंख्यक मुस्लिम महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग की। इसके अलावा उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण व्यवस्था को वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ही लागू किया जाए।
मानसून सत्र में आ सकता है विधेयक
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार आगामी मानसून सत्र में परिसीमन से जुड़ा विधेयक पेश करने की तैयारी कर सकती है। चर्चा है कि इस प्रक्रिया के तहत लोकसभा सीटों की संख्या में भी वृद्धि का प्रस्ताव आ सकता है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
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समर्थन को लेकर शुरू हुई राजनीतिक अटकलें
अखिलेश यादव की ओर से मांगें सामने आने के बाद राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि यदि सरकार इन सुझावों पर सहमति बनाती है तो विपक्ष का रुख नरम हो सकता है। हालांकि, यह केवल राजनीतिक आकलन है और समाजवादी पार्टी की ओर से परिसीमन बिल के समर्थन को लेकर अभी कोई औपचारिक फैसला सामने नहीं आया है।
बिल पारित कराने में विपक्ष की भूमिका अहम
यदि परिसीमन से जुड़ा कोई संवैधानिक संशोधन विधेयक संसद में लाया जाता है, तो उसे पारित कराने के लिए आवश्यक बहुमत की जरूरत होगी। ऐसे में सरकार के लिए विपक्षी दलों का सहयोग या कम से कम उनके रुख का अहम महत्व रहेगा। फिलहाल सभी की नजरें आगामी मानसून सत्र और इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की आधिकारिक रणनीति पर टिकी हुई हैं।