Akhilesh Yadav PDA : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी ने अभी से अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। लोकसभा चुनाव में पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले से मिले राजनीतिक लाभ के बाद अब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव इसी सामाजिक गठजोड़ को और मजबूत करने में जुट गए हैं। इसके लिए पार्टी ने दो अहम कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की है, जिनका सीधा संबंध बीजेपी के मजबूत राजनीतिक क्षेत्रों से है।
आगरा में दलित सम्मेलन पर फोकस
समाजवादी पार्टी 15 नवंबर को आगरा में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बड़ा दलित सम्मेलन आयोजित करने जा रही है। इसकी जिम्मेदारी राष्ट्रीय महासचिव रामजीलाल सुमन को दी गई है। आगरा को दलित राजनीति का मजबूत केंद्र माना जाता है। जिले में अनुसूचित जाति की आबादी 22 प्रतिशत से अधिक है और जाटव समाज का चुनावी प्रभाव काफी अहम माना जाता है। सपा की कोशिश है कि वह बसपा के पारंपरिक वोट बैंक में अपनी पकड़ मजबूत करे।
बसपा के वोट बैंक पर नजर
सपा मानती है कि बसपा की राजनीतिक स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं रही है। पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर उठे सवालों और संगठनात्मक बदलावों के बीच सपा दलित मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। आगरा, हाथरस, मथुरा, फिरोजाबाद, इटावा और मैनपुरी जैसे जिलों में जाटव मतदाता कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में आगरा सम्मेलन को सपा के बड़े सामाजिक अभियान के रूप में देखा जा रहा है।
2024 चुनाव से बढ़ा सपा का आत्मविश्वास
लोकसभा चुनाव 2024 में सपा और उसके सहयोगियों को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई जगह बेहतर समर्थन मिला था। इसी आधार पर पार्टी को उम्मीद है कि विधानसभा चुनाव में भी पीडीए समीकरण असर दिखा सकता है। हालांकि सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि दलित मतदाताओं का भरोसा किस हद तक समाजवादी पार्टी के पक्ष में आता है।
गोरखपुर में होगा राष्ट्रीय अधिवेशन
सपा की दूसरी बड़ी तैयारी गोरखपुर को लेकर है। दीपावली के आसपास यहां राष्ट्रीय अधिवेशन कराने की योजना बनाई जा रही है। गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक गढ़ माना जाता है। ऐसे में यहां अधिवेशन आयोजित कर सपा सीधे राजनीतिक संदेश देना चाहती है कि वह बीजेपी के सबसे मजबूत क्षेत्रों में भी चुनौती पेश करने के लिए तैयार है।
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निषाद, कुर्मी और ब्राह्मण समीकरण पर नजर
पूर्वांचल में बीजेपी की मजबूत पकड़ को देखते हुए सपा अब यादव और मुस्लिम वोटों के अलावा अन्य सामाजिक समूहों तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी की नजर निषाद, कुर्मी और ब्राह्मण समाज पर भी है। गोरखपुर और आसपास के इलाकों में निषाद समुदाय का अच्छा प्रभाव है, जबकि ब्राह्मण राजनीति भी यहां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगरा का दलित सम्मेलन और गोरखपुर का राष्ट्रीय अधिवेशन सपा की 2027 की चुनावी रणनीति के दो बड़े स्तंभ साबित हो सकते हैं।