लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सत्ता में वापसी संबंधी बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि वह कोई साधु-संत नहीं हैं, उन्हें गद्दी नहीं, कुर्सी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता की सेवा करने के लिए कुर्सी जरूरी है। दरअसल, योगी ने बिठूर की सभा में कहा था कि अखिलेश अब उत्तर प्रदेश की गद्दी पर नहीं बैठ पाएंगे।
भाजपा के पूर्व विधायकों समेत चार नेता सपा में शामिल
लखनऊ स्थित सपा कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान भाजपा के दो बार के पूर्व विधायक सिनोद शाक्य, बिसौली के पूर्व विधायक कुशाग्र सागर, भाजपा नेता चंद्र कुमार मिश्र और राम बहादुर पासी ने सपा की सदस्यता ग्रहण की। अखिलेश यादव ने इसे संगठन के विस्तार से जोड़ते हुए भाजपा पर राजनीतिक हमले भी किए।
सरकार बनने पर कई घोषणाओं का वादा
अखिलेश यादव ने कहा कि सपा सरकार बनने पर आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त की जाएगी। संविदा सफाई कर्मचारियों के लिए विशेष योजनाएं शुरू करने और वाल्मीकि समाज के बेघर लोगों को आवास देने का भी वादा किया। उन्होंने बड़े पैमाने पर साइकिलें बांटने और वकीलों के लिए चैंबर बनवाने की बात कही।
मतदाता सूची और कानून-व्यवस्था पर सवाल
सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा मतदाता सूची में हेराफेरी कर रही है। उन्होंने दावा किया कि 'सुनीता पत्नी राजेश' नाम से प्रदेश में दो हजार से अधिक प्रविष्टियां मिली हैं। उन्होंने मतदाता सूची को आधार से जोड़ने और बूथ स्तर पर बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू करने की मांग की।
अखिलेश ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित घुसपैठ, लखनऊ में हत्या और गोरखपुर जेल में संदिग्ध मौतों का जिक्र कर केंद्र और प्रदेश सरकार को घेरा। उन्होंने यूपीडा के 17 हजार करोड़ रुपये के टेंडर में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए विवादित होर्डिंग्स की फंडिंग और सोशल मीडिया पर आवाज दबाने के मुद्दे भी उठाए।