उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 12 दिसंबर को अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करने का ऐलान किया है। सपा नेता पवन पांडे ने छोटी दीपावली के अवसर पर इस दौरे की जानकारी दी। अखिलेश यादव इस दौरान हनुमानगढ़ी में दर्शन करने के साथ राम मंदिर में प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद लेंगे। उनके साथ पार्टी के सांसदों और विधायकों के भी अयोध्या पहुंचने की संभावना है। इस घोषणा के बाद प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।
2027 चुनाव से पहले सियासी रणनीति के मायने
अखिलेश यादव का यह दौरा केवल धार्मिक यात्रा नहीं माना जा रहा है। राजनीतिक जानकार इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के हिंदुत्व एजेंडे का जवाब देने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं। राम मंदिर बीजेपी की राजनीति का प्रमुख मुद्दा रहा है और पार्टी इसे अपनी बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश करती रही है। वहीं, राम मंदिर नहीं जाने को लेकर बीजेपी कई बार अखिलेश यादव पर सवाल उठा चुकी है। ऐसे में रामलला के दर्शन का फैसला सपा के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पहले भी जता चुके थे रामलला के दर्शन की इच्छा
पिछले महीने अयोध्या में पवन पांडे के आवास पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे अखिलेश यादव ने रामलला के दर्शन करने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा था कि इटावा में केदारेश्वर धाम का निर्माण पूरा होने के बाद वह अयोध्या जाएंगे। इसके लिए उन्होंने पवन पांडे को तारीख और मुहूर्त तय करने की जिम्मेदारी दी थी। अब 12 दिसंबर की तारीख सामने आने के बाद सपा प्रमुख के इस दौरे को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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बीजेपी के पुराने आरोपों का जवाब देने की कोशिश
राम मंदिर और अयोध्या को लेकर बीजेपी लगातार समाजवादी पार्टी को घेरती रही है। बीजेपी नेता कारसेवकों पर गोली चलाने की घटना का जिक्र कर सपा के पुराने रुख पर सवाल उठाते रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अखिलेश यादव को रामलला के दर्शन करने की सलाह दे चुके हैं। फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान सपा विधायकों की क्रॉस वोटिंग के बाद भी राम मंदिर का मुद्दा राजनीतिक चर्चा में रहा था। ऐसे में अखिलेश का अयोध्या दौरा बीजेपी के इन आरोपों का जवाब देने का एक प्रयास भी माना जा रहा है।
PDA की राजनीति और अयोध्या के स्थानीय मुद्दे भी अहम
हालांकि, सपा की राजनीति में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी PDA समीकरण की अहम भूमिका बनी हुई है। ऐसे में अखिलेश यादव धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक न्याय के मुद्दे को भी आगे बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा वह अयोध्या में विकास परियोजनाओं से प्रभावित स्थानीय लोगों के मुआवजे का सवाल भी उठा चुके हैं। उनका आरोप रहा है कि जिन लोगों की जमीन, मकान और दुकानें विकास कार्यों के लिए ली गईं, उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला। ऐसे में 12 दिसंबर का दौरा धार्मिक आस्था, स्थानीय समस्याओं और 2027 के चुनावी समीकरणों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।