
उत्तर प्रदेश की सियासत का पारा इस वक्त तेजी से चढ़ा हुआ है. सबसे ज्यादा चर्चा में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव हैं, जिन्होंने भाजपा को मात देने के लिए इस बार खास रणनीति तैयार की है. अखिलेश का नया दांव टिकट बंटवारे को लेकर है, जिसने न सिर्फ सपाइयों बल्कि सियासी विरोधियों को भी हैरान कर दिया है. बताया जा रहा है कि इस बार टिकट का खेल पुराने ढर्रे पर नहीं चलेगा. कोई भी दावेदार पक्का उम्मीदवार नहीं है, हर किसी को मेहनत करनी होगी.
BJP की रणनीति पर सपा का जवाब
दरअसल भाजपा ने पिछड़े, अतिपिछड़े और दलित वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए छोटे-छोटे दलों को साथ जोड़ा है. इन दलों की सबसे बड़ी मांग टिकट की होती है लेकिन अखिलेश का नया फॉर्मूला भाजपा खेमे में दबाव बढ़ाने वाला है. उन्होंने साफ कर दिया है कि टिकट बंटवारे में कोई जल्दी नहीं होगी. ऐसे में भाजपा के सहयोगी दलों के नेता असमंजस में पड़ सकते हैं और सपा उनके लिए नया विकल्प बन सकती है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह रणनीति भाजपा के गठबंधन तंत्र को कमजोर कर सकती है.
नाराजगी और भीतरघात पर लगाम
हर चुनाव में बड़ी पार्टियों की सबसे बड़ी चुनौती नाराज दावेदारों की होती है. टिकट न मिलने पर यही लोग या तो घर बैठ जाते हैं या विरोधी खेमे को मजबूत करते हैं लेकिन इस बार अखिलेश ने इसे ताकत बनाने की ठान ली है. उन्होंने पहले ही संकेत दे दिया है कि किसी को भी पक्की गारंटी नहीं दी जाएगी. इससे टिकट कटने पर किसी के पास शिकायत का मौका नहीं बचेगा और कार्यकर्ता अंत तक सक्रिय रहेंगे. दिलचस्प बात ये है कि अखिलेश यादव सिर्फ गठबंधन पर निर्भर नहीं रहना चाहते. उन्होंने संगठन को सभी 403 विधानसभा सीटों पर तैयारी का टारगेट दिया है. अगर कांग्रेस या किसी दल से तालमेल होता है तो ठीक, वरना पार्टी अकेले मैदान में उतरने को तैयार है. यही नहीं, सपा की नजर बिहार चुनाव पर भी है. कांग्रेस के प्रदर्शन के आधार पर यूपी में सीट बंटवारे की रणनीति तय होगी.
चुनावी जंग का नया ब्रह्मास्त्र
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अखिलेश यादव ने इस बार टिकट बंटवारे को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया है. न कोई वादा, न गारंटीबस संगठन और मेहनत पर भरोसा. यही स्टाइल सपा को गुटबाजी से बचाएगा और भाजपा के लिए सिरदर्द बनेगा. कार्यकर्ता भी समझ गए हैं कि टिकट की चाबी अखिलेश के पास है और उसे पाने के लिए मैदान में पसीना बहाना ही होगा. साफ है, अखिलेश का ये नया खेला यूपी की सियासत का खेल बदलने की ताकत रखता है.