Al Falah: अल फलाह ग्रुप और विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन जव्वाद अहमद सिद्दीकी को फरीदाबाद में दिनभर चली छापेमारी के बाद ईडी ने मंगलवार रात गिरफ्तार किया। उसके बाद उन्हें देर रात अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान के आवास पर पेश किया गया, जहां लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें 13 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया। ईडी के अनुसार, सिद्दीकी ने विश्वविद्यालय और उसके ट्रस्ट के माध्यम से गलत मान्यता दिखाकर छात्रों से ठगी कर लगभग 415 करोड़ रुपये की अवैध आमदनी की। यह जांच 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए विस्फोट के मामले से जुड़ी है, जिसमें 15 लोगों की मौत हुई थी और विश्वविद्यालय के एक डॉक्टर उमर नबी की भूमिका आत्मघाती हमलावर के रूप में सामने आई थी।
विदेश भागने की फिराक में था सिद्दीकी
ईडी ने कोर्ट में बताया कि सिद्दीकी के विदेश भागने की पूरी संभावना थी, क्योंकि उसके परिवार के कई करीबी सदस्य खाड़ी देशों में बसे हुए हैं। एजेंसी का कहना है कि सिद्दीकी ने अपनी कमाई के जरिए न केवल विश्वविद्यालय के नाम पर भारी-भरकम धन जमा किया, बल्कि व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल से भी उसका अप्रत्यक्ष संबंध जांच में सामने आ रहा है। इसी मॉड्यूल में तीन डॉक्टरों सहित 10 लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। अदालत ने माना कि मामला बेहद गंभीर है और जांच शुरुआती चरण में है, इसलिए विस्तृत पूछताछ के लिए हिरासत जरूरी है।
विश्वविद्यालय की भूमिका पर बढ़े सवाल
जांच एजेंसियों के अनुसार, अल फलाह यूनिवर्सिटी का नाम व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क से जुड़े मामलों में तेजी से उभर रहा है। आरोप है कि डॉक्टर उमर नबी, जो विश्वविद्यालय-सह-अस्पताल से जुड़ा था, ने विस्फोटकों से भरी कार चलाकर लाल किले के पास आत्मघाती हमला किया। ईडी का कहना है कि यह संस्थान फर्जी मान्यता और गलत वादों के माध्यम से छात्रों व अभिभावकों को गुमराह कर भारी रकम जुटाता रहा। हालांकि, सिद्दीकी के वकीलों का दावा है कि उनके मुवक्किल को राजनीतिक और जांच दबाव के तहत फंसाया जा रहा है। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद यह सुनिश्चित किया कि पीएमएलए के तहत गिरफ्तारी प्रक्रिया पूरी तरह सही है और आगे की जांच के लिए हिरासत अनिवार्य है।