नई दिल्ली।10 नवंबर को दिल्ली में लाल किला के सामने हुए बम धमाकों के पीछे का आतंकवादी डॉ. उमर नबी अल-फ़लाह विश्वविद्यालय से जुड़ा पहला आतंकवादी नहीं है। 2007-08 के सिलसिलेवार बम धमाकों के पीछे के प्रमुख आतंकवादियों में से एक, मिर्ज़ा शादाब बेग, अल-फ़लाह विश्वविद्यालय का छात्र भी रहा।
मिर्ज़ा शादाब बेग ने 2007 में फरीदाबाद के अल-फ़लाह इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स और इंस्ट्रूमेंटेशन में बी.टेक पूरा किया। उसी वर्ष, वह 2007 के गोरखपुर धमाकों में शामिल था और बाद में इंडियन मुजाहिदीन के आतंकवादी नेटवर्क का एक प्रमुख व्यक्ति बन गया। इसका मतलब है कि वह एक ही समय में पढ़ाई और आतंकवादी गतिविधियों में सक्रिय था।
बता दें कि दिल्ली को दहलाने वाले फिदायीन हमले ने जांच एजेंसियों के सामने एक ऐसे टेरर मॉड्यूल का खुलासा किया है, जिसकी असल ताकत बंदूक नहीं बल्कि मेडिकल कोडवर्ड थे। हाई प्रोफाइल डॉक्टर अस्पतालों की ओपीडी में इलाज करते हुए गुपचुप तरीके से जिहादी ऑपरेशन चला रहे थे।
मिर्जा शादाब बेग, ने चिल्ड्रेन स्कूल, आजमगढ़ से 12वीं पास की। इसके बाद फरीदाबाद के अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज से 2007 में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन में बी.टेक किया। इसके बाद वह इंडियन मुजाहिदीन का खतरनाक कमांडर बन गया और कई बम धमाकों की साजिश रच डाली. खुफिया एजेंसियों ने बताया कि शादाब आजमगढ़ यूनिट का सरगना था। भटकल ब्रदर्स रियाज़ और यासिन के साथ मिलकर उसने इंडियन मुजाहिदीन का गठन किया। सूत्रों के अनुसार, वह इस समय पाकिस्तान में है और ट्रेनिंग या फंडिंग के लिए सऊदी अरब भी गया।
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13 सितंबर 2008 को दिल्ली में हुए सीरियल ब्लास्ट का आरोपी है शादाब
2008 के दिल्ली धमाकों में इंडिया गेट पर बम प्लांट करने का काम शादाब ने खुद किया। अहमदाबाद और दिल्ली दोनों सीरियल ब्लास्ट में उसका नेटवर्क जुड़ा था। वह दिल्ली के स्टूडेंट ग्रुप और आजमगढ़ के आतिफ अमीन के ग्रुप को मिलाने वाला मुख्य कड़ी था। इसके लिए उसने कर्नाटक से डेटोनेटर लाया। पुणे के जर्मन बेकरी ब्लास्ट में भी उसका नाम सामने आया। जयपुर ब्लास्ट के लिए उदुपी जाकर भारी मात्रा में डेटोनेटर और बेयरिंग्स सप्लाई किए। पुणे के जर्मन बेकरी ब्लास्ट (2010) में भी उसका नाम सामने आया। बटला हाउस एनकाउंटर के बाद चार इंडियन मुजाहिदीन मेंबर पकड़े गए, लेकिन शादाब और मोहम्मद खालिद आज भी फरार हैं।2008 में भारत के दो बड़े शहरों दिल्ली और अहमदाबाद में खौफनाक धमाके हुए। अहमदाबाद में धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई और 246 लोग घायल हुए, वहीं 13 सितंबर 2008 को दिल्ली में हुए सीरियल ब्लास्ट में 20 लोग मारे गए और 100 से ज्यादा घायल हुए।