यूरोप के एक छोटे लेकिन तेजी से डिजिटल हो रहे देश में दुनिया की पहली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मंत्री एक बार फिर सुर्खियों में है। वर्चुअल अवतार ‘डिएला’ को जहां संसद के लिए 83 डिजिटल सहायक तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है, वहीं उसे बनाने वाली सरकारी एजेंसी के शीर्ष अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने से विवाद भी खड़ा हो गया है।
भ्रष्टाचार जांच में फंसी एजेंसी, सरकार सतर्क
डिएला को विकसित करने वाली राष्ट्रीय डिजिटल एजेंसी के दो वरिष्ठ अधिकारियों को कथित भ्रष्टाचार के मामले में हाउस अरेस्ट किया गया है। उन पर सरकारी ठेकों में हेरफेर, रिश्वत लेने और आपराधिक संगठनों से संपर्क रखने के आरोप लगाए गए हैं। यही एजेंसी देश की ई-गवर्नेंस और डिजिटल सेवाओं का संचालन करती है, इसलिए इस घटनाक्रम ने भ्रष्टाचार विरोधी अभियान पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार की ओर से कहा गया है कि जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
AI अवतार डिएला ने दी सफाई
डिएला एक वर्चुअल किरदार है, जिसे पारंपरिक परिधान में प्रस्तुत किया जाता है और वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सरकारी कामकाज में AI के इस्तेमाल को बढ़ावा देती रही है। संसद को दिए गए एक वीडियो संदेश में उसने कहा था कि वह इंसान नहीं है, इसलिए उसके पास निजी स्वार्थ या महत्वाकांक्षा नहीं हो सकती। उसके अनुसार उसका काम केवल डेटा और एल्गोरिदम के आधार पर नागरिकों की निष्पक्ष सेवा करना है। भ्रष्टाचार के आरोपों पर उसने अफसोस जताया और पारदर्शिता की बात दोहराई।
सरकारी सेवाओं में निभा रही अहम भूमिका
डिएला नागरिकों को ऑनलाइन दस्तावेज बनवाने, अपॉइंटमेंट तय करने और सरकारी प्रक्रियाएं समझने में मदद करती है। इससे पहले जहां रिश्वत और देरी की शिकायतें आती थीं, वहां अब डिजिटल प्रणाली के जरिए काम तेजी से होने का दावा किया जा रहा है। भविष्य में उसे सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स के आवेदनों की जांच करने और डेटा के आधार पर सबसे उपयुक्त बोलीदाता चुनने की जिम्मेदारी भी दी जाएगी, जिसकी ऑडिटिंग संभव होगी।
83 डिजिटल असिस्टेंट तैयार करने की योजना
देश के प्रधानमंत्री ने मजाकिया अंदाज में बताया कि AI मंत्री ‘प्रेग्नेंट’ है और उसके 83 “बच्चे” आने वाले हैं। दरअसल ये बच्चे डिजिटल असिस्टेंट होंगे, जो संसद में सत्तारूढ़ दल के 83 सांसदों की मदद करेंगे। ये सहायक बैठकों का रिकॉर्ड रखेंगे, अनुपस्थिति की सूचना देंगे और बहस के दौरान जरूरी जानकारियां तुरंत उपलब्ध कराएंगे। इस सिस्टम को 2026 के अंत तक पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
डिजिटल भविष्य और पारदर्शिता की परीक्षा
सरकार का कहना है कि AI के जरिए सार्वजनिक खरीद और प्रशासनिक फैसलों में पारदर्शिता बढ़ाई जाएगी, ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लगे। हालांकि एजेंसी के अधिकारियों पर लगे आरोपों ने यह सवाल भी खड़े कर दिए हैं कि तकनीक के संचालन में मानवीय जवाबदेही कैसे तय होगी। आने वाले महीनों में जांच के नतीजे और AI परियोजनाओं की प्रगति पर अंतरराष्ट्रीय नजर बनी रहेगी।