दिल्ली के लाल किला के पास हुए कार बम धमाके की जांच में हर दिन बड़े-बड़े खुलासे हो रहे हैं. वहीं अब बताया जा रहा है कि अब जांच एजेंसियों द्वारा अल-फलाह यूनिवर्सिटी (फरीदाबाद) को पूरी तरह अपने घेरे में ले लिया गया है. अब इस यूनिवर्सिटी के 200 से ज्यादा डॉक्टर, लेक्चरर और स्टाफ जांच एजेंसियों के रडार पर हैं. सूत्रों के अनुसार हॉस्टल और बाहर रहने वाले छात्रों के कमरों की तलाशी ली जा रही है. इसके साथ ही अब तक 1000 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा चुकी है. उधर व्हाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल के खुलासे के बाद एजेंसी द्वारा GMC में डॉक्टरों-स्टाफ के लॉकरों की जांच शुरू कर दी गई है.
छुट्टी लेकर घर लौट रहे कर्मचारी
जांच एजेंसियां ये पता लगाने में जुटी हुई हैं कि ब्लास्ट के बाद कितने लोग यूनिवर्सिटी छोड़कर गए और उनकी पहचान क्या है. वहीं कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन का डेटा डिलीट कर दिया है, जिसकी भी गहन जांच की जा रही है. विश्वविद्यालय के सूत्रों का कहना है कि वे छुट्टी लेकर अपने घर लौट रहे हैं. वहीं बुधवार को कई कर्मचारी अपना सामान गाड़ियों में भरकर यूनिवर्सिटी गेट से निकलते हुए दिखाई दिए है.
उमर को किराए पर कमरा देने वाली महिला अरेस्ट
वहीं जांच एजेंसियों ने अब एक 35 साल की महिला को हिरासत में लिया है. जिसने आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर उन नबी को नूंह की हिदायत कॉलोनी में कमरा किराए पर दिया था. ये आंगनवाड़ी कार्यकर्ता महिला दिल्ली बम धमाकों के बाद से फरार चल रही थी. घटना के बाद से ही उसका परिवार भी जांच के दायरे में है. सूत्रों का कहना है कि उमर ने नूंह में रहते वक्त कई मोबाइल फोन इस्तेमाल किए थे. नूंह में 7 अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा रही है, ताकि उमर के उनसे संबंध का पता लगाया जा सके.
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अस्पताल में मरीजों की संख्या आधी से भी कम
दूसरी तरफ दिल्ली ब्लास्ट के बाद से अल-फलाह अस्पताल में मरीजों की संख्या आधी से भी कम हो गई है. जहां पहले रोजाना 200 के करीब OPD मरीज आया करते थे, वहीं अब 100 से कम आ रहे हैं. इसके साथ ही जांच एजेंसियां ये भी पता लगा रही हैं कि क्या विश्वविद्यालय के अंदर कोई हैंडलर था, क्योंकि उमर को संस्थान में विशेष सुविधाएं मिला करती थीं.
छह महीने गायब रहा था उमर
विश्वविद्यालय से MBBS की पढ़ाई करने के बाद यहां पर अप्रेंटिसशिप कर रहे दो डॉक्टरों का कहना है कि साल 2023 में उमर बिना किसी छुट्टी और सूचना के करीब छह महीने तक अस्पताल और विश्वविद्यालय से गायब रहा था. अस्पताल सूत्रों ने कहा कि इस घटना का सबसे अजीब पहलू ये है कि वापस आते ही वह सीधे ड्यूटी पर लौट आया और उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई.
हफ्ते में एक या दो लेक्चर ही लेता था उमर
उन्होंने बताया कि उमर बहुत कम क्लास लिया करता था. वह हफ़्ते में केवल एक या दो लेक्चर ही लेता था और वो भी महज 15-20 मिनट के. इसके बाद फिर वह अपने कमरे में वापस चला जाता था. इस वजह से दूसरे लेक्चरर उसे पसंद नहीं करते थे, क्योंकि वे पूरा वक्त पढ़ाते रहता था.
एक चौंकाने वाले खुलासे में डॉक्टरों ने कहा कि उमर को अस्पताल में हमेशा शाम या रात की शिफ्ट में ही काम दिया जाता था. उसे कभी सुबह की शिफ्ट में काम नहीं दिया जाता थाय
यूनिवर्सिटी में बना अस्थायी कमांड सेंटर
इस वक्त अल फलाह विश्वविद्यालय में कई जांच टीमें काम कर रही हैं. कैंपस के अंदर NIA, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल, उत्तर प्रदेश ATS, फरीदाबाद क्राइम ब्रांच और जम्मू-कश्मीर पुलिस की टीमें लगातार काम कर रही हैं. मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम भी यहां पहुंच गई है. सभी जांच एजेंसियों ने यूनिवर्सिटी परिसर में ही अस्थायी कमांड सेंटर बना रखा है.
GMC में डॉक्टरों-स्टाफ के लॉकरों की जांच शुरू
वहीं दूसरी ओर दिल्ली ब्लास्ट और "व्हाइट कॉलर" आतंकी मॉड्यूल के खुलासे के बाद जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में बुधवार से डॉक्टरों-स्टाफ के लॉकरों की व्यापक जांच शुरू कर दी गई है. इस महीने की शुरुआत में यहीं पर डॉ. अदील राथर के लॉकर से AK-47 बरामद हुआ था, जिसके बाद से कई डॉक्टरों का आतंकी मॉड्यूल पकड़ा गया और 2900 किलो विस्फोटक बरामद हुए थे.
इस दौरान अनक्लेम्ड लॉकर चिह्नित किए गए हैं और अस्पताल प्रशासन को रिकॉर्ड अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं. ताकि भविष्य में इसका दुरुपयोग न हो. दिल्ली ब्लास्ट की जांच ने अब मेडिकल कॉलेजों और डॉक्टरों के आतंकी कनेक्शन को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है. आगे आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की आशंका है.