संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में राजनीतिक हलचल देखने को मिली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान विपक्षी दलों ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसदों को बुलाए जाने का विरोध करते हुए सांकेतिक वॉकआउट किया। हालांकि कुछ देर बाद बातचीत के बाद विपक्षी नेता फिर बैठक में शामिल हो गए। बैठक में आगामी मानसून सत्र के सुचारु संचालन को लेकर चर्चा हुई।
15 मिनट बाद विपक्ष ने किया सांकेतिक वॉकआउट
रविवार सुबह संसद भवन एनेक्सी में आयोजित सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी, डीएमके सहित कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। बैठक शुरू होने के करीब 15 मिनट बाद विपक्षी सांसद बाहर निकल आए और विरोध दर्ज कराया। हालांकि यह वॉकआउट सांकेतिक था और कुछ देर बाद सभी दलों के प्रतिनिधि दोबारा बैठक में शामिल हो गए।
टीएमसी के बागी सांसदों को बुलाने पर जताई आपत्ति
विपक्ष का कहना था कि टीएमसी के 20 बागी सांसदों के समूह को बैठक में आमंत्रित किया गया, जबकि उनके अलग गुट को लेकर संसदीय प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया कि जब संबंधित मामले पर निर्णय लंबित है, तब उन्हें सर्वदलीय बैठक में किस आधार पर शामिल किया गया। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने अपना विरोध दर्ज कराया।
महुआ मोइत्रा ने उठाए सवाल
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि विपक्ष के सभी प्रमुख दलों ने इस मुद्दे पर एकजुट होकर विरोध किया। उनका कहना था कि जिन सांसदों के नए राजनीतिक समूह को लेकर संसदीय मान्यता का मामला लंबित है, उन्हें बैठक में आमंत्रित किए जाने का आधार स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर विपक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करा चुका है।
संसद के सुचारु संचालन पर सरकार की अपील
बैठक के दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से संसद के सुचारु संचालन में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और सभी दलों को चर्चा एवं संवाद के माध्यम से जनहित के मुद्दे उठाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हंगामे की बजाय सार्थक बहस लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करती है।
20 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। हर सत्र से पहले होने वाली सर्वदलीय बैठक का उद्देश्य सरकार के विधायी एजेंडे की जानकारी देना, विपक्ष के सुझाव लेना और सदन के संचालन को लेकर सभी दलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना होता है।