इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निकाह, हलाला और तीन तलाक से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि इन प्रथाओं की आड़ में महिलाओं के यौन शोषण की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि व्यक्तिगत कानूनों का इस्तेमाल किसी भी आपराधिक कृत्य को संरक्षण देने के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने मामले में आरोपियों की याचिकाएं खारिज कर दीं और जांच जारी रखने के निर्देश दिए।
अमरोहा के मामले पर सुनवाई
यह मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के सैदनागली थाना क्षेत्र से जुड़ा है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि कम उम्र में निकाह, तीन तलाक, हलाला और दोबारा निकाह के नाम पर उसके साथ लगातार यौन शोषण किया गया। आरोपियों ने एफआईआर रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने बताई गंभीरता
न्यायालय ने कहा कि शुरुआती जांच में सामने आए तथ्य बेहद गंभीर हैं। अदालत के अनुसार प्रथम दृष्टया मामला नाबालिग के साथ दुष्कर्म और एक घटना में सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों से जुड़ा प्रतीत होता है। कोर्ट ने कहा कि इन आरोपों की निष्पक्ष और गहन जांच आवश्यक है तथा इस स्तर पर एफआईआर रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता।
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व्यक्तिगत कानून अपराध से ऊपर नहीं
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब मामला आपराधिक कानून का हो, तब विवाह या व्यक्तिगत कानूनों का हवाला देकर किसी अपराध से छूट नहीं मिल सकती। अदालत ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और किसी भी प्रथा या परंपरा की आड़ में आपराधिक कृत्यों को वैध नहीं ठहराया जा सकता।
जांच जारी रहेगी
अदालत ने कहा कि मामले की सच्चाई जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगी। इसलिए इस चरण में जांच रोकना उचित नहीं होगा। कोर्ट के फैसले के बाद अब संबंधित एजेंसियां मामले की विवेचना आगे बढ़ाएंगी और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।