UP News: उत्तर प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षामित्रों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने का रास्ता खुला है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें विशेष टीईटी में शामिल करने की मांग भले ही खारिज कर दी है, लेकिन परीक्षा पास करने के लिए छह अवसर देने का निर्देश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार और उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को 31 अगस्त 2028 तक कम से कम छह नियमित टीईटी परीक्षाएं कराने को कहा है।
परीक्षा विज्ञापन को चुनौती दी गई थी
न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने यह आदेश वसीम अहमद की विशेष अपील पर दिया। अपील में शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी से बाहर रखने के शासनादेश और परीक्षा विज्ञापन को चुनौती दी गई थी याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि वे 20 वर्षों से अधिक समय से शिक्षामित्र के रूप में काम कर रहे हैं। संविदा पर नियुक्त विशेष शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया गया, जबकि उन्हें इससे वंचित रखा गया। यह समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
सेवा की स्थिति अलग, इसलिए विशेष परीक्षा से बाहर
हाईकोर्ट ने कहा कि नियमित पदों पर नियुक्त सहायक अध्यापकों और मानदेय पर कार्यरत शिक्षामित्रों की सेवा की प्रकृति अलग-अलग है। विशेष शिक्षकों को दिव्यांग और विशेष जरूरत वाले बच्चों को पढ़ाने के कारण अलग श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी से बाहर रखना भेदभाव नहीं है।
2028 के बाद नहीं मिलेगा अतिरिक्त मौका
आयोग ने अदालत को बताया कि अगली नियमित टीईटी परीक्षा 26 और 27 फरवरी 2027 को होगी। इसके बाद जून-जुलाई और दिसंबर-जनवरी में परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि 2026, 2027 और 2028 में प्रत्येक वर्ष दो अवसर दिए जाएं। छह परीक्षाओं का लक्ष्य पूरा करने के लिए 2028 में 31 अगस्त से पहले एक अतिरिक्त परीक्षा भी करानी होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समयसीमा के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत कोई अतिरिक्त अवसर नहीं मिलेगा।