इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सोमवार, 7 जुलाई को उत्तर प्रदेश सरकार को एक बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने 50 से कम छात्रों वाले प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों को पास के स्कूलों के साथ मर्जर (जोड़ने) के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं खारिज कर दी है. जस्टिस पंकज भाटिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि यह एक नीतिगत निर्णय है और अदालत इसका हस्तक्षेप नहीं करेगी. इस तरह सरकार को इस कदम को लागू करने का रास्ता साफ हो गया है.
क्या फैसला आया?
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 7 जुलाई 2025 को यूपी सरकार के स्कूल मर्जर फैसले को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं खारिज कर दीं. जस्टिस पंकज भाटिया ने यह फैसला सुनाया कि यह एक नीतिगत निर्णय है, जिस पर अदालत हस्तक्षेप नहीं करेगी.
याचिकाएं सीतापुर से 51 बच्चों और दूसरा समूह बिलसंडा, पीलीभीत से जुड़ी थीं, जिनमें कहा गया कि कम छात्रों वाले स्कूलों को बड़े स्कूलों से जोड़ना शिक्षा के अधिकार (Article 21A) का उल्लंघन है.
याचिकाकर्ताओं की दलीलें
अधिवक्ता एल.पी. मिश्रा और गौरव मेहरोत्रा ने कहा कि 6–14 साल तक के बच्चों को पास के स्कूल का अधिकार है और मर्जर से उन्हें स्कूलों तक पहुंचने की मुश्किल होगी. उनका यह भी तर्क था कि सरकार ने सरल रास्ते के तौर पर स्कूलों को जोड़ना चुना, जबकि शिक्षा गुणवत्ता सुधारना जरूरी था, ना कि सिर्फ स्कूल बंद करना.
सरकार की दलीलें
अध्यक्ष महाधिवक्ता अनुज कुदेसिया, शैलेंद्र सिंह और संदीप दीक्षित ने तर्क दिया कि इस निर्णय में कोई नियम-उल्लंघन नहीं है और यह केवल ‘मर्जर’ नहीं बल्कि स्कूल की ‘पेयरिंग’ प्रक्रिया है. सरकार का कहना था कि कई स्कूलों में एक भी बच्चा नहीं था या बहुत कम बच्चे थे, जिससे शिक्षक और संसाधनों का उपयोग सही से नहीं हो रहा था. मर्जर से ये संसाधन नज़दीकी स्कूलों में अच्छे से इस्तेमाल होंगे और बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सकेगी.
अदालत का सारांश दृष्टिकोण
अदालत ने स्पष्ट किया कि नीतिगत निर्णयों में शासन की आज़ादी होती है और जब तक उसमें संवैधानिक उल्लंघन न हो, तब तक कोर्ट को रोक लगाना उचित नहीं होता. कोर्ट ने इस मामले में पाया कि याचिकाकर्ताओं ने कोई संवैधानिक उल्लंघन साबित नहीं किया, इसलिए उनके आदेश को खारिज कर दिया गया.
अब क्या होगा?
अब सरकार को प्रशासनिक कार्रवाई में कानूनी सहारा मिल गया है और वह 5000 से अधिक कम छात्र‑संख्या वाले स्कूलों का मर्जर प्रभावी ढंग से लागू कर सकती है. इसका उद्देश्य है शिक्षा गुणवत्ता सुधारना, संसाधनों का बेहतर उपयोग और पेयरिंग के जरिए बच्चों को मजबूत स्कूल में भेजना.