इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक विवाहित प्रेमी जोड़े को बड़ी राहत देते हुए उन्हें सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि चूंकि दोनों बालिग हैं, इसलिए वे अपनी मर्जी से एक-दूसरे के साथ रहने के लिए स्वतंत्र हैं. साथ ही, उन्हें कानूनी रूप से आवश्यक सुरक्षा भी मिलनी चाहिए.
यह फैसला हाईकोर्ट की डिविजन बेंच, जिसमें जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस अनिल कुमार शामिल हैं, उन्होंने ये सुनाया. मामला बुलंदशहर जिले का है, जहां रहने वाली प्रिया सोलंकी और उनके पति ने अपने परिवार से जान का खतरा जताते हुए हाईकोर्ट से सुरक्षा की मांग की थी. याचिका में उन्होंने 'ऑनर किलिंग' की साजिश की आशंका जताई थी.
तीन सप्ताह में मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने बुलंदशहर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को निर्देश दिया है कि वह इस जोड़े को सुरक्षा मुहैया कराएं. इसके अलावा, कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में गिरफ्तारी पर भी अंतरिम रोक लगा दी है. कोर्ट ने मामले में सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब देने का आदेश दिया है.
क्या है मामला?
मई महीने में बुलंदशहर के खुर्जा थाने में लड़की के पिता द्वारा एफआईआर दर्ज कराई गई थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी का अपहरण एक ऊंची जाति के युवक द्वारा किया गया और आर्य समाज मंदिर में जबरन शादी की गई. यह शिकायत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 87 (अपहरण) के तहत दर्ज की गई थी.
हालांकि कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि एक बालिग महिला को अपने जीवनसाथी का चयन करने का पूरा संवैधानिक अधिकार है, और यह जबरन विवाह का मामला नहीं है.
कोर्ट का रुख संवेदनशील और सख्त
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला उन मामलों में नजीर बन सकता है जहां समाज और परिवार की बंदिशों की वजह से प्रेम विवाह करने वाले जोड़ों को प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है. कोर्ट ने अपने रुख में स्पष्ट किया है कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्रता और समानता का अधिकार देता है, और इसमें विवाह का अधिकार भी शामिल है.