Bengal from June 1: पश्चिम बंगाल सरकार ने धर्म के आधार पर दी जाने वाली सरकारी आर्थिक मदद को बंद करने का बड़ा फैसला लिया है। सरकार की दूसरी कैबिनेट बैठक में तय किया गया कि 1 जून 2026 से इमामों, मुअज्जिनों और पुजारियों को मिलने वाला मासिक भत्ता और मानदेय बंद कर दिया जाएगा। यह योजनाएं पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में शुरू की गई थीं।
ममता सरकार ने शुरू की थीं ये योजनाएं
ममता बनर्जी सरकार ने 2012 में इमामों के लिए मासिक भत्ता योजना शुरू की थी। बाद में मुअज्जिनों और मंदिरों के पुजारियों को भी आर्थिक सहायता दी जाने लगी। चुनाव से पहले इमामों का भत्ता बढ़ाकर 3,000 रुपये और पुजारियों का मानदेय 2,000 रुपये किया गया था। अब नई सरकार ने इन सभी योजनाओं को समाप्त करने का निर्णय लिया है।
हजारों लोगों पर पड़ेगा असर
सरकार के इस फैसले का असर राज्य के हजारों इमामों, मुअज्जिनों और पुजारियों पर पड़ सकता है। हालांकि सरकार की ओर से अभी विस्तृत नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है, इसलिए अन्य प्रभावित योजनाओं की पूरी तस्वीर सामने आना बाकी है। माना जा रहा है कि धार्मिक आधार पर दी जाने वाली अन्य सहायता योजनाओं की भी समीक्षा हो सकती है।
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कैबिनेट बैठक में लिए गए कई अहम फैसले
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि पिछली सरकार के दौरान फंड वितरण में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए रिटायर्ड जज जस्टिस बिस्वजीत दास की अध्यक्षता में जांच आयोग बनाया गया है। इसके अलावा महिलाओं पर अत्याचार से जुड़े मामलों की जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस समापति चटर्जी की अध्यक्षता में एक अलग कमेटी का गठन किया गया है।
अन्नपूर्णा योजना और 7वें वेतन आयोग को मंजूरी
सरकार ने 1 जून से ‘अन्नपूर्णा योजना’ लागू करने का भी फैसला लिया है, जिसके तहत महिलाओं को 3,000 रुपये की सहायता दी जाएगी। साथ ही महिलाओं को सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा भी मिलेगी। कैबिनेट ने 7वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी देने के साथ ओबीसी सूची की समीक्षा के लिए भी जांच समिति बनाने का निर्णय लिया है।