Aman Sehrawat Asian Games Gold : भारतीय कुश्ती के युवा सितारे अमन सहरावत ने एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन कर दिया है। हरियाणा के झज्जर से निकलकर एशिया के सबसे बड़े खेल मंच तक पहुंचने वाले अमन का सफर संघर्ष, मेहनत और हौसले की मिसाल है। बचपन में माता-पिता को खोने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आज भारत के सबसे बड़े पहलवानों में अपनी जगह बना ली है।
वर्ल्ड चैंपियन को हराकर जीता गोल्ड
नागोया में खेले गए पुरुषों के 57 किलोग्राम फ्रीस्टाइल फाइनल में अमन सहरावत ने नॉर्थ कोरिया के मौजूदा विश्व चैंपियन चोंग सोंग हान को 11-7 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। मुकाबले के दौरान अमन ने शानदार तकनीक और आक्रामक खेल दिखाया। पूरे मैच में उन्होंने बढ़त बनाए रखी और दबाव के बीच भी खुद को संभाले रखा।
2023 के ब्रॉन्ज को बदला गोल्ड में
अमन के लिए यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि 2023 एशियन गेम्स में वह ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल हुए थे। इस बार उन्होंने अपने प्रदर्शन को और बेहतर किया और सीधे गोल्ड मेडल तक पहुंचे। फाइनल से पहले उन्होंने सेमीफाइनल में ताजिकिस्तान के ऐयाल बेलोल्यूब्स्की को 14-8 से हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई थी।
10 साल की उम्र में खो दिए थे मां-बाप
अमन सहरावत का बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजरा। जब वह सिर्फ 10 साल के थे तब उनकी मां का निधन हो गया। परिवार इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि एक साल बाद उनके पिता भी दुनिया छोड़ गए। कम उम्र में माता-पिता का साया सिर से उठ जाने के बाद उनकी परवरिश चाचाओं ने की और हर कदम पर उनका साथ दिया।
मिट्टी के अखाड़े से शुरू हुआ सफर
हरियाणा के बिरोहर गांव के मिट्टी वाले अखाड़ों से अमन की कुश्ती यात्रा शुरू हुई। उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें दिल्ली के प्रसिद्ध छत्रसाल स्टेडियम भेजा गया, जहां कोच ललित कुमार के मार्गदर्शन में उनका खेल और निखरा। तेज रफ्तार, आक्रामक अंदाज और लगातार मूवमेंट उनकी पहचान बन गए, जिसने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई।
जूनियर स्तर से ही दिखा था दम
अमन ने कम उम्र में ही बड़े मंचों पर अपनी छाप छोड़नी शुरू कर दी थी। 2018 और 2019 की अंडर-17 विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीते। 2019 में अंडर-17 एशियन चैंपियनशिप का गोल्ड भी उनके नाम रहा। इसके बाद 2022 में अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप और अंडर-23 एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने खुद को भविष्य का बड़ा सितारा साबित कर दिया।
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ओलंपिक ब्रॉन्ज से एशियन गेम्स गोल्ड तक
पेरिस ओलंपिक 2024 में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले अमन का सफर इसके बाद भी आसान नहीं रहा। चोट और फिटनेस की समस्याओं ने कई बार उनके रास्ते में बाधाएं खड़ी कीं। 2025 विश्व चैंपियनशिप में बीमारी के कारण वह प्रतियोगिता से बाहर भी हो गए थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और शानदार वापसी करते हुए एशियन गेम्स में गोल्ड जीत लिया। आज अमन सहरावत के नाम ओलंपिक ब्रॉन्ज और एशियन गेम्स गोल्ड दोनों हैं, और उनकी कहानी यह साबित करती है कि मजबूत इरादों के सामने मुश्किल हालात भी हार मान लेते हैं।