मध्यप्रदेश की एजुकेशन कैपिटल माने जाने वाले इंदौर में छात्रों ने खेती की दुनिया में नया इतिहास रच दिया है। होलकर विज्ञान महाविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों ने मिट्टी नहीं, बल्कि पानी में सब्जियां उगाकर यह साबित कर दिया है कि खेती केवल खेतों तक सीमित नहीं रही। खास बात ये है कि इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी तरह के कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं हुआ। इस अनोखे प्रयोग ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना ली है और यह प्रोजेक्ट शहरी खेती और रिसर्च का एक प्रेरणादायक मॉडल बन गया है।
हाइड्रोपोनिक्स से उगाई जा रही सब्जियां
छात्रों ने हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का इस्तेमाल कर सब्जियों की खेती की है। इस प्रणाली में पौधों को मिट्टी की बजाय पोषक तत्वों से भरपूर पानी में उगाया जाता है। यह तकनीक खास तौर पर शहरी क्षेत्रों, जलसंकटग्रस्त इलाकों और घरों की छतों के लिए बेहद उपयुक्त मानी जा रही है। इससे खेती करना आसान, स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक बन गया है।
शिक्षा, रिसर्च और इनोवेशन का बना मॉडल
होलकर कॉलेज में तैयार की गई यह हाइड्रोपोनिक यूनिट अब सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि शिक्षण और नवाचार का केंद्र बन चुकी है। यहां पर दूसरे कॉलेजों के छात्र भी आकर इस तकनीक की ट्रेनिंग ले रहे हैं। कई छात्रों ने इसी मॉडल से प्रेरित होकर अपने घरों में शहरी खेती की शुरुआत कर दी है। इस प्रोजेक्ट के लिए कॉलेज को पुरस्कार भी मिल चुका है।
एयरोपोनिक्स तकनीक भी चर्चा में
हाइड्रोपोनिक्स के साथ-साथ कॉलेज में एयरोपोनिक्स तकनीक पर भी काम हो रहा है। इसमें पौधों की जड़ों पर पोषक तत्वों की धुंध का छिड़काव किया जाता है। यह प्रणाली कम जगह और पानी में अधिक उत्पादन देती है। दोनों ही तकनीकें भविष्य की स्मार्ट फार्मिंग का हिस्सा बन रही हैं।
औषधीय पौधों पर रिसर्च से नए आयाम
कॉलेज की पीएचडी छात्रा समीरा मंसूरी रोजमेरी और पुदीना जैसे औषधीय पौधों पर रिसर्च कर रही हैं। हाइड्रोपोनिक सिस्टम में इन पौधों की ग्रोथ रेट बेहतर पाई गई है और इनमें मौजूद फाइटोकेमिकल्स की मात्रा भी ज्यादा मिली है। समीरा की रिसर्च यह साबित करने की दिशा में है कि बिना मिट्टी और कीटनाशक के भी गुणवत्तापूर्ण फसलें उगाई जा सकती हैं।