शारदीय नवरात्रि 2025 का शुभारंभ हो चुका है और पूरे देश में माता दुर्गा की आराधना का माहौल बना हुआ है। इस पावन पर्व में जहां ज्यादातर मंदिरों में देवी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है, वहीं गुजरात-राजस्थान की सीमा पर स्थित अंबाजी मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां देवी मां की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि आंखों पर पट्टी बांधकर पवित्र “श्री विजय यंत्र” की पूजा की जाती है।
बिना मूर्ति का अद्भुत शक्तिपीठ
गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित अंबाजी मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है। माउंट आबू से लगभग 45 किलोमीटर दूर यह मंदिर माता अंबा को समर्पित है। यहां देवी की कोई प्रतिमा या छवि स्थापित नहीं है। मुख्य गर्भगृह में पवित्र “श्री विजय यंत्र” को ही देवी का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि इसे नग्न आंखों से नहीं देखा जा सकता, इसलिए श्रद्धालु आंखों पर पट्टी बांधकर पूजा करते हैं।
फोटोग्राफी पर कड़ा प्रतिबंध
अंबाजी मंदिर में फोटोग्राफी पूरी तरह वर्जित है। सफेद संगमरमर से बना यह भव्य मंदिर 1975 से लगातार जीर्णोद्धार के दौर से गुजर रहा है। मंदिर का शिखर 103 फीट ऊंचा है और इसे 358 स्वर्ण कलशों से सजाया गया है। नवरात्रि के दिनों में यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और भव्य सजावट मंदिर की दिव्यता को और बढ़ा देती है।
गब्बर पहाड़ी का धार्मिक महत्व
मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर दूर गब्बर नामक पहाड़ी पर माता के पैरों के निशान आज भी मौजूद हैं। यहां तक पहुंचने के लिए 999 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मान्यता है कि अंबाजी माता के दर्शन के बाद गब्बर पहाड़ी पर जाना पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। पूर्णिमा के दिन यहां हजारों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।