रिलायंस इंडस्ट्रीज अब सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर में बड़ा दांव खेलने की तैयारी कर रही है। अब तक इस क्षेत्र में स्टारलिंक और दूसरी विदेशी कंपनियों का दबदबा रहा है, लेकिन अब मुकेश अंबानी इस खेल में बड़ी एंट्री करने जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक रिलायंस लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट सेगमेंट में अरबों डॉलर निवेश करने पर विचार कर रही है। कंपनी का लक्ष्य भारत को सैटेलाइट इंटरनेट सेक्टर में मजबूत बनाना है।
खुद अंबानी कर रहे निगरानी
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की अगुवाई खुद मुकेश अंबानी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि पिछले कई महीनों से युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। इस प्रोजेक्ट के लिए छह अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं, जो सैटेलाइट, लॉन्च सिस्टम, पेलोड और यूजर टर्मिनल जैसे हिस्सों पर काम कर रही हैं। रिलायंस की सैटेलाइट कंपनी को जियो प्लेटफॉर्म्स के तहत रखा जाएगा। कंपनी के कई बड़े अधिकारी भी इस मिशन में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
मस्क और विदेशी कंपनियों से मुकाबला
फिलहाल इस सेक्टर में एलन मस्क की स्टारलिंक सबसे बड़ी खिलाड़ी मानी जाती है। इसके अलावा ऐमजॉन लियो, वनवेब और दूसरी कंपनियां भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। रिलायंस चाहती है कि भारत इस क्षेत्र में विदेशी कंपनियों पर पूरी तरह निर्भर न रहे। यही वजह है कि कंपनी तेजी से अपना सैटेलाइट नेटवर्क तैयार करने की योजना बना रही है। सरकार भी चाहती है कि देश की सुरक्षा और डिजिटल भविष्य के लिए भारत की खुद की मजबूत सैटेलाइट क्षमता विकसित हो।
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ऑर्बिटल स्लॉट के लिए तैयारी
सूत्रों के मुताबिक रिलायंस ने डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस से संपर्क शुरू कर दिया है। कंपनी इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन में ऑर्बिटल स्लॉट और रेडियो फ्रीक्वेंसी के लिए आवेदन की तैयारी कर रही है। यह वही सिस्टम है जिसके जरिए सैटेलाइट को अंतरिक्ष में तय जगह और नेटवर्क फ्रिक्वेंसी मिलती है। बताया जा रहा है कि रिलायंस दूसरी सैटेलाइट कंपनियों को खरीदने के विकल्प पर भी विचार कर रही है ताकि जल्दी से इस रेस में शामिल हो सके।
भारत को होगा बड़ा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रिलायंस इस प्रोजेक्ट में सफल होती है तो भारत को बड़ा फायदा मिल सकता है। स्वदेशी सैटेलाइट नेटवर्क बनने से देश को विदेशी कंपनियों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। इसके अलावा इंटरनेट और कम्युनिकेशन सेक्टर में नई क्रांति भी आ सकती है। फिलहाल यह प्रोजेक्ट शुरुआती दौर में है, लेकिन जिस तेजी से काम चल रहा है, उससे साफ है कि आने वाले समय में सैटेलाइट इंटरनेट की दुनिया में भारत भी बड़ा खिलाड़ी बन सकता है।