महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद में बना बीजेपी और कांग्रेस का अप्रत्याशित गठबंधन अब टूट चुका है। इस गठबंधन की खबर सामने आते ही दोनों ही दलों को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। कुछ ही घंटों में यह साफ हो गया कि यह सियासी प्रयोग ज्यादा दिन नहीं चलने वाला। अब कांग्रेस ने कदम पीछे खींचते हुए गठबंधन से खुद को अलग कर लिया है, जिससे स्थानीय राजनीति में हलचल और तेज हो गई है।
कांग्रेस का सख्त फैसला, स्थानीय नेतृत्व पर गिरी गाज
गठबंधन टूटते ही कांग्रेस ने कड़ा एक्शन लिया है। पार्टी ने अंबरनाथ के ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को निलंबित कर दिया है। आरोप है कि उन्होंने पार्टी की अनुमति के बिना बीजेपी के साथ स्थानीय स्तर पर गठबंधन किया। इसके साथ ही कांग्रेस ने अंबरनाथ की स्थानीय इकाई को भंग कर दिया और वहां से जीते सभी 12 पार्षदों को भी सस्पेंड कर दिया। पार्टी का कहना है कि अनुशासन तोड़ने वालों पर सख्ती जरूरी थी।
कांग्रेस की सफाई, गठबंधन से किया किनारा
कांग्रेस प्रवक्ता ने साफ कहा कि पार्टी और बीजेपी के बीच कोई औपचारिक गठबंधन नहीं है। उनके मुताबिक, स्थानीय स्तर पर बिना इजाजत गठबंधन किया गया, जो पार्टी नीति के खिलाफ है। इसी वजह से कारण बताओ नोटिस जारी किए गए और कार्रवाई की गई। कांग्रेस का यह रुख बताता है कि पार्टी अब इस पूरे मामले से खुद को पूरी तरह अलग दिखाना चाहती है।
मुख्यमंत्री की नाराजगी, पहले ही दे दी थी चेतावनी
कांग्रेस के एक्शन से पहले ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस गठबंधन पर नाराजगी जता चुके थे। उन्होंने अंबरनाथ और अकोला में कांग्रेस और अन्य दलों के साथ हुए गठबंधनों को अनुशासनहीनता बताया था। मुख्यमंत्री ने साफ कहा था कि वरिष्ठ नेतृत्व की मंजूरी के बिना ऐसे किसी भी गठबंधन को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि ऐसे फैसलों को तुरंत रद्द करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
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नगर परिषद का गणित, कैसे बना था यह समीकरण
अंबरनाथ नगर परिषद में कुल 59 पार्षद हैं। दिसंबर 2025 में हुए चुनावों में एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, लेकिन बहुमत से चार सीट पीछे रह गई। बीजेपी को 15 और कांग्रेस को 12 सीटें मिली थीं। शिवसेना को सत्ता से दूर रखने के लिए बीजेपी और कांग्रेस ने मिलकर 31 पार्षदों का समर्थन जुटाया और बहुमत का दावा किया था।
सियासी नुकसान और आगे की राह
इस गठबंधन को लेकर शिवसेना गुट में नाराजगी खुलकर सामने आई थी। इसे विश्वासघात बताया गया और बीजेपी पर सवाल उठे। अब गठबंधन टूटने और कांग्रेस की कार्रवाई के बाद यह साफ है कि स्थानीय राजनीति में जल्द नए समीकरण बन सकते हैं। आने वाले दिनों में अंबरनाथ की सत्ता किसके हाथ जाएगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।