अमेरिका ने विभिन्न देशों के 10 लोगों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। इन पर ईरान के रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बल लॉजिस्टिक्स (एमओडीएएफएल) के लिए हथियार और सैन्य उपकरण खरीदने में मदद करने का आरोप है। एक रिपोर्ट के मुताबिक इनमें पाकिस्तानी कंपनियों का भी जिक्र है।'द मीडिया लाइन' ने अपने विश्लेषण के आधार पर दावा किया कि जिन लोगों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनमें एक पाकिस्तानी व्यवसायी और उससे जुड़ी तीन कंपनियां शामिल हैं।
हथियारों की खरीद-फरोख्त में मदद
इसके अलावा, यह व्यवसायी पाकिस्तान स्थित 'कैवेलियर ग्रुप' का चेयरमैन है। ये एक प्राइवेट डिफेंस कंपनी है जो पाकिस्तान और अन्य देशों में काम करती है। अमेरिका का आरोप है कि इस व्यक्ति और कंपनी ने ईरानी रक्षा मंत्रालय के लिए बिचौलिए का काम किया और हथियारों की खरीद-फरोख्त में मदद की।
सहयोगी कंपनियों से भी जुड़ा है
रिपोर्ट के अनुसार, यह व्यवसायी पाकिस्तान में 'कैवेलियर डायनामिक्स प्राइवेट लिमिटेड' का मुख्य शेयरधारक और चीफ एग्जीक्यूटिव है। वह सऊदी अरब और तुर्की की उन सहयोगी कंपनियों से भी जुड़ा है जिन पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। दावा किया गया है कि सऊदी अरब स्थित 'कैवेलियर डायनामिक्स फॉर टेक्नोलॉजीज' के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई में सऊदी ने मदद की।
उत्पादन और खरीद का काम
अमेरिका का आरोप है कि व्यवसायी ने एमओडीएएफएल को वित्तीय, सामग्री और तकनीकी सहायता मुहैया कराई या किसी तरह पहुंचाने की कोशिश की। एमओडीएएफएल ईरान के सशस्त्र बलों के लिए हथियारों के रिसर्च, उत्पादन और खरीद का काम देखता है। अमेरिकी सरकार ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन प्रोग्राम में शामिल संगठनों पर भी नजर रखती है।
ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट
इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वाशिंगटन उन लोगों और संस्थाओं को निशाना बनाना जारी रखेगा जो ईरान को मदद पहुंचाते हैं। यह 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत किया जाएगा, जिसे अगस्त में ईरानी सरकार के आर्थिक नेटवर्क को बाधित करने के लिए शुरू किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेजरी ने कहा कि इस पहल का मकसद उन आय के स्रोतों को रोकना है जिनका इस्तेमाल ईरान प्रतिबंधों से बचने, उग्रवादी गतिविधियों को फंड करने और अपने रक्षा कार्यक्रमों को जारी रखने के लिए करता है।
सेकेंडरी प्रतिबंध लगने का खतरा
इसमें यह भी कहा गया कि ईरान की ओर से प्रतिबंधों से बचने या मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल संस्थाओं को अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से बाहर किए जाने और उन पर सेकेंडरी प्रतिबंध लगने का खतरा है। वहीं, कैवेलियर ग्रुप खुद को पाकिस्तान की एक प्रमुख प्राइवेट सेक्टर डिफेंस कंपनी बताता है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने अमेरिकी आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।