2024 में शेख हसीना के सत्ता छोड़ने के बाद बांग्लादेश से निष्पक्ष चुनावों की उम्मीद थी, लेकिन डॉ. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार पर सवाल उठने लगे हैं. यूनुस की नीतियों ने देश को स्थिरता की बजाय और गहरे संकट में धकेल दिया है.
सेना का अल्टीमेटम और सड़कों पर उबाल
सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमां ने चेतावनी दी है—दिसंबर तक चुनाव न हुए तो सेना हस्तक्षेप करेगी. छात्र संगठन और विपक्षी दल जैसे BNP और जमात-ए-इस्लामी आंदोलन की तैयारी में हैं. वे शेख हसीना के कार्यकाल की जांच और चुनाव सुधार की मांग पर अड़े हैं.
अंतरराष्ट्रीय प्रभाव: यूनुस बनाम सेना
डॉ. यूनुस पर अमेरिकी झुकाव स्पष्ट है. रिपोर्टों के मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलीलुर रहमान अमेरिकी नागरिक हैं. अमेरिका रोहिंग्या संकट के लिए ‘ह्यूमेनिटेरियन कॉरिडोर’ चाहता है, जिसे सेना म्यांमार के विद्रोहियों की मदद मान रही है.
रूस की ओर झुकती सेना
सेना और यूनुस सरकार के बीच तनातनी बढ़ रही है. अप्रैल में जनरल जमां ने रूस दौरा किया और सैन्य साझेदारी को मजबूती दी. रूसी नौसेना की मौजूदगी और हथियार समझौतों से संकेत साफ है—सेना सत्ता के लिए तैयार है.
भारत के लिए नई कूटनीतिक चुनौती
यूनुस सरकार चीन और पाकिस्तान के करीब गई है, जिससे भारत चिंतित है. ट्रांजिट एग्रीमेंट की वापसी के बाद भारत के लिए जनरल जमां और रूस की साझेदारी एक नया रणनीतिक अवसर बन सकती है, खासकर रूपपुर परमाणु परियोजना जैसे साझा प्रयासों के ज़रिए.