ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में टकराव से पैदा हुए तेल संकट के बीच रूस ने भारत को खुला भरोसा दिया है कि गैस, तेल और कोयले की सप्लाई में कोई कमी नहीं आएगी। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 13 मई 2026 को दिल्ली दौरे से पहले कहा, "मैं गारंटी देता हूं कि रूस से होने वाली आपूर्ति के संबंध में भारत के हितों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। हम हर संभव कोशिश करेंगे कि यह अनुचित और बेईमान प्रतिस्पर्धा हमारे समझौतों को नुकसान न पहुंचे। रूस भारत को गैस, तेल और कोयले जैसे हाइड्रोकार्बन की आपूर्ति लगातार जारी रखे हुए है। भविष्य में सहयोग और मजबूत होगा।"लावरोव ने कहा कि भारत-रूस के रिश्ते बहुत मजबूत और खास हैं। ऐसी कोई स्थिति नहीं हो सकती जिसमें दोनों देशों के रास्ते अलग हो जाएं।
क्यों जरूरी है ये भरोसा?
ईरान-अमेरिका जंग से होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग खतरे में है। भारत का 40% कच्चा तेल इसी रास्ते आता है। हालात ऐसे हैं कि PM मोदी को देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील करनी पड़ी। PM, गृहमंत्री, रक्षामंत्री ने काफिलों में गाड़ियां कम कर दीं। भारत अब रूस, अमेरिका, वेस्ट अफ्रीका, सेंट्रल एशिया से भी तेल ले रहा है। ऑस्ट्रेलिया-कनाडा ने भी गैस सप्लाई का ऑफर दिया है।
तेल सप्लाई करने के लिए हमेशा तैयार
रूस-भारत ऊर्जा सहयोग के सबूत कुडनकुलम परमाणु संयंत्र में देखने को मिला। तमिलनाडु में रूस की तकनीकी मदद से बन रहा है। यह भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करता है। रूसी एंबेसेडर डेनिस अलीपोव ने पहले ही कहा था- "रूस भारत को तेल सप्लाई करने के लिए हमेशा तैयार है"।
रूस का भरोसा भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम
सरकार के पास अभी 25 दिन का कच्चा तेल और 6-8 हफ्ते का पेट्रोल-डीजल स्टॉक है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान की खुफिया मदद की थी। ऐसे में रूस का भरोसा भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम है। मिडिल ईस्ट में जंग और होर्मुज में टैंकरों पर हमलों से तेल संकट गहराया है। लेकिन रूस ने दोस्ती निभाते हुए साफ कहा है - भारत को गैस-तेल-कोयले की सप्लाई नहीं रुकेगी। भारत ने भी रूस, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा से वैकल्पिक सप्लाई के इंतजाम कर लिए हैं।