Terror Funding Prevention : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने BIMSTEC देशों के गृहमंत्रियों की पहली बैठक में आतंकवाद और नशीले पदार्थों की तस्करी को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ड्रग्स की अवैध कमाई का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने में किया जा रहा है। शाह ने साफ किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलता है। उनके मुताबिक, अब सुरक्षा की चुनौतियां किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं, इसलिए इनसे निपटने के लिए क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग बढ़ाना जरूरी है।
ड्रग्स की कमाई से मजबूत हो रहे आपराधिक नेटवर्क
अमित शाह ने कहा कि नशीले पदार्थों की अवैध कमाई संगठित अपराध को आर्थिक ताकत देती है। इसी पैसे का इस्तेमाल आतंकवादी संगठनों को आर्थिक मदद पहुंचाने में भी हो सकता है। उन्होंने बताया कि नशीले पदार्थों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की अवैध आपूर्ति और डार्क वेब के जरिए होने वाले लेनदेन ने इस चुनौती को और जटिल बना दिया है। ऐसे नेटवर्क सीमाओं के पार काम करते हैं और अलग-अलग देशों की कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। इसलिए इनकी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए साझा रणनीति की जरूरत है।
BIMSTEC देशों के सहयोग पर जोर
बैठक को संबोधित करते हुए शाह ने BIMSTEC को क्षेत्रीय एकीकरण, आर्थिक सहयोग और सामूहिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि भारत शांति, सह-अस्तित्व और मानव कल्याण के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध है। गृहमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद, संगठित अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी जैसी आपस में जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की बात कही। उन्होंने संबंधित समझौतों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी जोर दिया।
खुफिया जानकारी साझा करना क्यों जरूरी?
अमित शाह के मुताबिक, आपराधिक नेटवर्क तेजी से अपने तरीके बदल रहे हैं। वे प्रचार करने, लोगों की भर्ती करने और अवैध गतिविधियों के लिए धन जुटाने में नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में केवल अलग-अलग देशों की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। उन्होंने खुफिया एजेंसियों, कानून लागू करने वाली संस्थाओं, वित्तीय निगरानी एजेंसियों और सीमा सुरक्षा से जुड़ी इकाइयों के बीच तेजी से जानकारी साझा करने की जरूरत बताई। इससे संदिग्ध लेनदेन और सीमा पार चलने वाले नेटवर्क की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
मानव तस्करी को भी बताया गंभीर चुनौती
गृहमंत्री ने मानव तस्करी के मुद्दे पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि यह साझा सुरक्षा और मानवाधिकारों के सामने गंभीर चुनौती है। पीड़ितों की पहचान, उन्हें बचाने, सहायता देने, पुनर्वास करने और सुरक्षित घर लौटाने के लिए देशों के बीच सहयोग जरूरी है। शाह के मुताबिक, मानव तस्करी और संगठित अपराध से जुड़े नेटवर्क कई बार सीमाओं के पार सक्रिय रहते हैं। इसलिए पीड़ितों की सुरक्षा के साथ-साथ अपराधियों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई भी महत्वपूर्ण है।
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आतंकवाद के खिलाफ क्षेत्रीय रणनीति की जरूरत
BIMSTEC बैठक में अमित शाह के बयान का मुख्य संदेश यह रहा कि ड्रग्स की तस्करी, संगठित अपराध और आतंकवादी फंडिंग को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। इन गतिविधियों के बीच संभावित आर्थिक और नेटवर्क संबंधों की जांच करना जरूरी है। भारत ने सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने और सुरक्षा सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया है। अब इस दिशा में वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि सदस्य देश खुफिया जानकारी साझा करने, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन पर निगरानी और सीमा पार अपराध के खिलाफ कितनी प्रभावी संयुक्त कार्रवाई करते हैं।