Amit Shah launches: संसद के शीतकालीन सत्र में चुनाव सुधारों पर हुई चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी पर सत्ता विरोधी लहर के आरोप लगाने वाले पहले अपने कार्यों पर नजर डालें। शाह ने स्पष्ट किया कि बीजेपी को भी कई राज्यों में हार मिली है, लेकिन पार्टी ने कभी चुनाव आयोग या मतदाता सूची पर सवाल नहीं उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे और विपक्ष को अपनी हार के लिए EVM या सिस्टम को दोष देने के बजाय नेतृत्व की कमजोरियों पर आत्ममंथन करना चाहिए।
पहली वोट चोरी का जिक्र
अमित शाह ने अपने भाषण में कांग्रेस के इतिहास की ओर इशारा करते हुए ‘पहली वोट चोरी’ का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद प्रधानमंत्री चयन के लिए हुए मतदान में सरदार पटेल को 28 वोट मिले थे, जबकि जवाहरलाल नेहरू को केवल दो वोट मिले। इसके बावजूद नेहरू को प्रधानमंत्री बना दिया गया, जिसे शाह ने वोट चोरी का बड़ा उदाहरण बताया। उन्होंने यह भी कहा कि इंदिरा गांधी के चुनाव को हाई कोर्ट ने अवैध ठहराया था और उस फैसले से बचने के लिए संसद में ऐसा कानून लाया गया, जिसमें प्रधानमंत्री पर केस नहीं चलने की व्यवस्था की गई। शाह के अनुसार, यह भी वोट चोरी को ढकने का प्रयास था।
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नागरिकता से पहले मतदाता बनने का आरोप
गृह मंत्री ने अपने भाषण में एक अन्य विवाद का भी जिक्र किया, जिसमें दावा किया गया कि सोनिया गांधी भारत की नागरिकता आधिकारिक रूप से प्राप्त करने से पहले ही मतदाता सूची में शामिल कर ली गई थीं। शाह ने कहा कि यह गंभीर मामला है और इसे भी वोट चोरी का रूप माना जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी ने जीवन का बड़ा हिस्सा विपक्ष में बिताया, कई चुनाव हारे, लेकिन कभी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठाया। शाह ने विपक्ष को सलाह दी कि चुनावी हार का कारण मतदाता सूची या ईवीएम नहीं, बल्कि नेतृत्व की कमियां होती हैं, और एक दिन कांग्रेस कार्यकर्ता भी यही सवाल अपने नेताओं से पूछेंगे।