
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में बुधवार को एक अहम घटनाक्रम देखने को मिला। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने न सिर्फ गंभीर आपराधिक मामलों में नेताओं की गिरफ्तारी से जुड़े संविधान (130वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश किया, बल्कि इसे आगे अध्ययन के लिए संसद की संयुक्त समिति (Joint Committee) को भेजने का भी प्रस्ताव रखा। शाह का यह कदम विधेयक पर विस्तृत विमर्श और व्यापक अध्ययन की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जा रहा है।
थरूर ने जताई सहमति, कहा- समिति में चर्चा से लोकतंत्र होगा मजबूत
विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि अगर इस बिल को अध्ययन के लिए समिति को भेजा जाता है तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद सकारात्मक कदम होगा। थरूर ने कहा, “मुझे लगता है कि समिति के भीतर चर्चा होना हमारे लोकतंत्र के लिए अच्छा है... तो चलिए, इस पर चर्चा करते हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी संवैधानिक संशोधन पर जल्दबाजी की बजाय गहराई से विचार करना ज्यादा लाभकारी साबित होता है।
विपक्ष और सरकार आमने-सामने
विपक्षी दलों ने इस विधेयक पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह कदम राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ावा दे सकता है, जबकि सरकार का तर्क है कि लोकतंत्र की पवित्रता बनाए रखने और आपराधिक छवि वाले नेताओं को सत्ता से दूर रखने के लिए यह संशोधन जरूरी है। शाह ने विपक्ष से अपील की कि वे इस मुद्दे को राजनीति की बजाय देशहित की दृष्टि से देखें।