दिल्ली की सियासत में जब अमित शाह किसी फैसले पर ठहर जाते हैं, तो उसका असर सिर्फ संगठन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आने वाले चुनावों की दिशा भी तय हो जाती है। उत्तर प्रदेश जैसे देश के सबसे बड़े सियासी मैदान में बीजेपी ने प्रदेश अध्यक्ष को लेकर लगभग अपना फैसला कर लिया है। लंबे मंथन, जमीनी फीडबैक और सामाजिक समीकरणों की गहन समीक्षा के बाद पार्टी नेतृत्व एक ऐसे नाम पर पहुंच चुका है, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोनों की सहमति मानी जा रही है। यही वजह है कि प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ अब औपचारिकता भर रह गई है और संगठन के भीतर नई जिम्मेदारी को लेकर हलचल तेज हो गई है।
महाराजगंज से 7 बार के सांसद हैं पंकज चौधरी
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश बीजेपी का अगला अध्यक्ष केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी हो सकते हैं। महाराजगंज से सात बार के सांसद पंकज चौधरी फिलहाल संगठन और सरकार, दोनों के लिए भरोसेमंद चेहरा माने जाते हैं। भले ही नामांकन और घोषणा की औपचारिक प्रक्रिया बाकी हो, लेकिन अंदरखाने फैसला लगभग तय माना जा रहा है। पार्टी का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में ऐसा अध्यक्ष जरूरी है, जो विवादों से दूर रहे, संगठन को एकजुट रखे और हर वर्ग के साथ संतुलन बना सके। इन कसौटियों पर पंकज चौधरी पूरी तरह फिट बैठते नजर आ रहे हैं।
जमीनी पकड़, संगठन में भरोसे का प्रमाण
पंकज चौधरी की राजनीति किसी शॉर्टकट की कहानी नहीं है। उन्होंने 1989 में गोरखपुर नगर निगम से पार्षद बनकर सियासत में कदम रखा था। इसके बाद महाराजगंज को अपनी राजनीतिक जमीन बनाया और 1991 में पहली बार लोकसभा पहुंचे। तब से लेकर अब तक सात बार सांसद बनना उनकी जमीनी पकड़ और संगठन में भरोसे का प्रमाण है। उन्होंने जीत के साथ हार भी देखी, लेकिन जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं से उनका जुड़ाव कभी कमजोर नहीं पड़ा। यही कारण है कि उन्हें एक शालीन, जमीन से जुड़े और भरोसेमंद नेता के रूप में देखा जाता है।
कुर्मी समुदाय से आते हैं पंकज चौधरी
पंकज चौधरी कुर्मी समुदाय से आते हैं, जो उत्तर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा ओबीसी वोटबैंक माना जाता है। यही अमित शाह की रणनीति का अहम हिस्सा है। बीजेपी एक बार फिर गैर यादव ओबीसी को मजबूती से अपने साथ जोड़ने की तैयारी में है। 2024 के चुनाव में समाजवादी पार्टी की पीडीए रणनीति से मिले झटके के बाद, पंकज चौधरी को आगे करना उसी का जवाब माना जा रहा है। मोदी और योगी दोनों का भरोसा, संगठन का अनुभव और सामाजिक संतुलन की समझ उन्हें इस भूमिका के लिए मजबूत बनाती है। पार्टी के भीतर चर्चा है कि नाम तय है, अब सिर्फ ऐलान बाकी है, और इसके बाद यूपी की सियासत में विपक्ष की बेचैनी साफ दिखाई देगी।