
Noida News: शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए एमिटी विश्वविद्यालय नोएडा और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस एंड असेसमेंट ने सेवा-पूर्व शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। दोनों संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर के साथ इस कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई, जो बेहतर शैक्षिक परिणामों के लिए मजबूत साझेदारी का प्रतीक है।
इंटर्नशिप के अवसर भी शामिल
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस एंड असेसमेंट (दक्षिण एशिया) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आशीष अरोड़ा, एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डॉ. बलविंदर शुक्ला, कैम्ब्रिज इंटरनेशनल एजुकेशन (दक्षिण एशिया) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष व क्षेत्रीय निदेशक विनय शर्मा और एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन की प्रमुख डॉ. अलका मुदगल ने संबोधित किया। नए बी.एड. स्नातकों और महत्वाकांक्षी शिक्षकों के लिए डिज़ाइन किया गया यह लघु-अवधि प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम क्षमता निर्माण पर केंद्रित है। इसमें इंटर्नशिप के अवसर भी शामिल हैं और यह मौजूदा व्यावसायिक विकास कार्यक्रमों का पूरक होगा।
नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप
आशीष अरोड़ा ने कहा, "शिक्षा का भविष्य शिक्षकों को सशक्त बनाने में है। यह प्री-सर्विस प्रोग्राम भावी शिक्षकों को पूछताछ-आधारित शिक्षा, आलोचनात्मक सोच, सामाजिक-भावनात्मक विकास और एआई जैसी उभरती तकनीकों के उपयोग से लैस करेगा। यह नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है।"
चुनौतियों से निपटने के लिए शिक्षकों को तैयार करेगा
डॉ. बलविंदर शुक्ला ने कहा, "एमिटी के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अशोक चौहान के 2047 तक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाने के सपने के तहत यह कार्यक्रम साकार हुआ है। इसमें शैक्षिक कौशल, पाठ योजना, कक्षा प्रबंधन, प्रौद्योगिकी व एआई का एकीकरण और अभिभावक-समुदाय भागीदारी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। यह समकालीन चुनौतियों से निपटने के लिए शिक्षकों को तैयार करेगा।"
2030 तक 44 मिलियन शिक्षकों की जरूरत
डॉ. अलका मुदगल ने बताया, "यूनेस्को रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक 44 मिलियन शिक्षकों की जरूरत है। एनईपी 2020 और सर्वोत्तम प्रथाओं पर आधारित यह प्रमाणन विविध कक्षाओं के लिए शिक्षकों को तैयार करेगा और व्यावहारिक अनुभव देगा। यह सहयोग शिक्षक शिक्षा में नया मानक स्थापित करेगा।"
विद्यालयों की प्रधानाचार्यों की परिचर्चा हुई
कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों की प्रधानाचार्यों की परिचर्चा भी हुई, जिसमें उन्होंने अपने विचार साझा किए। यह पहल भारत के विकसित शैक्षिक परिदृश्य में शिक्षकों की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।