
उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर को होने जा रहा है और बीजेपी ने इसे अपने गठबंधन की ताकत दिखाने का बड़ा मौका बना लिया है. NDA की एकता और रणनीति का प्रदर्शन अब संसद में देखने को मिलेगा. जिसकी तैयारियां पूरी तरह से जोरों पर है, खबर है कि 17 सितंबर को NDA की बैठक में कुछ बड़ा संकेत देखने को मिल सकता है. सूत्रों की मानें तो आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर भी इस बैठक में चर्चा होगी. जिसमें BJP के पास चुनाव से पहले शक्ति प्रदर्शन का अहम अवसर होगा, बता दें संसद के मानसून सत्र के दूसरे चरण के दौरान ये बैठक मंगलवार से शुरू होगी, जिसमें NDA के सभी सांसदों को बुलाया गया है. सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसदीय दल के सांसदों को संबोधित कर सकते हैं.
अगले उपराष्ट्रपति उम्मीदवार पर मंथन
हालांकि ये बैठक सामान्य तौर पर नियमित लगती है, लेकिन 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर इसे अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे पहले पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दिया था. इस बीच, NDA के शीर्ष नेताओं की एक और बैठक नामांकन के दिन आयोजित होगी, जिसमें एकता का संदेश देने के साथ सहयोगी दलों को भी प्रस्तावक और समर्थक बनाया जाएगा. बीजेपी ने अपने संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे. इसमें पार्टी प्रमुख जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत वरिष्ठ नेता शामिल होंगे. सूत्रों के मुताबिक, अगले उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार पार्टी और RSS की विचारधारा से गहराई से जुड़ा होगा, ताकि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के विपरीत पार्टी और क्षेत्रीय संदेश दोनों स्पष्ट हो सकें.
NDA की रणनीति और शक्ति प्रदर्शन का प्रतीक
इसके साथ ही, NDA सांसदों को वोटिंग प्रक्रिया और रणनीति समझाने के लिए संसद भवन में तीन दिन की वर्कशॉप का आयोजन किया जाएगा. सरकार के रणनीतिकार विपक्ष से संपर्क करके आम सहमति बनाने की कोशिश भी करेंगे, हालांकि विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वो अपना उम्मीदवार उतारेगा. माना जा रहा है कि ये उपराष्ट्रपति चुनाव सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए एक बड़ा ताकत परीक्षण साबित होगा. बीजेपी अपने बहुमत के लिए मुख्य सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी यानी TDP और जनता दल यूनाइटेड यानी JDU पर निर्भर है, जबकि विपक्ष वोटर लिस्ट विवाद और अन्य मुद्दों पर एकजुट नजर आ रहा है. बीजू जनता दल BJD ने ओडिशा में सत्ता गंवाने के बाद समर्थन देने की संभावना कम कर दी है. इस तरह, बीजेपी इस उपराष्ट्रपति चुनाव में केवल उम्मीदवार चुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि ये बैठक और तैयारी NDA की रणनीति और शक्ति प्रदर्शन का प्रतीक बनने जा रही है.