India Medical Tourism : महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने भारत के मेडिकल टूरिज्म सेक्टर को लेकर बड़ा सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि कम लागत पर इलाज भारत की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन दुनिया का प्रमुख मेडिकल टूरिज्म केंद्र बनने के लिए केवल सस्ता इलाज पर्याप्त नहीं होगा। मरीजों का भरोसा और बेहतर अनुभव भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
भारत के पास लागत का फायदा
आनंद महिंद्रा ने बताया कि पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में लगभग हर तरह की चिकित्सा प्रक्रिया काफी कम लागत में उपलब्ध है। इसके बावजूद मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में भारत अभी दुनिया में 10वें स्थान पर है। थाईलैंड, तुर्की, मलेशिया और सिंगापुर जैसे देश इस मामले में भारत से आगे हैं।
Recently watched this clip on India's medical tourism boom, and it got me thinking about what's still missing.
— anand mahindra (@anandmahindra) September 12, 2026
So I did some quick online research.
Our cost advantage over the West is enormous, on almost every procedure. Yet we rank only 10th globally. Behind Thailand, Turkey,… pic.twitter.com/PtODE7baq9
मरीज का पूरा अनुभव अहम
महिंद्रा का मानना है कि मेडिकल टूरिज्म केवल अस्पताल तक सीमित नहीं है। मरीज के लिए एयरपोर्ट से लेकर होटल, टैक्सी, अस्पताल, भोजन, सेवा और इलाज के बाद वापसी तक का पूरा अनुभव महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी भी स्तर पर परेशानी होती है तो सस्ते इलाज का फायदा कम हो सकता है और मरीज का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
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कंसियर्ज सिस्टम की जरूरत
उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को मेडिकल टूरिज्म के लिए मजबूत ‘कंसियर्ज सिस्टम’ विकसित करना चाहिए। इसका उद्देश्य विदेशी मरीजों की पूरी यात्रा को आसान बनाना होना चाहिए। इलाज से पहले, इलाज के दौरान और इलाज के बाद भी मरीज को हर तरह की सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
नए शहरों में अवसर
आनंद महिंद्रा ने गोवा और विशाखापत्तनम को मेडिकल टूरिज्म के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावना जताई। उन्होंने कहा कि इन शहरों में बेहतर हवाई संपर्क और आतिथ्य सुविधाएं पहले से मौजूद हैं। साथ ही अमरावती और गिफ्ट सिटी जैसे उभरते शहरों में अभी से हेल्थ डिस्ट्रिक्ट विकसित करने की योजना बनाने की जरूरत है।
2030 तक दोगुना हो सकता है बाजार
महिंद्रा के अनुसार भारत का मेडिकल टूरिज्म बाजार 2030 तक लगभग दोगुना हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत को केवल सस्ता इलाज देने वाला देश नहीं, बल्कि ऐसा गंतव्य बनना चाहिए जहां मरीजों को इलाज के साथ भरोसा, सुविधा और मानसिक संतोष भी मिले। उनका मानना है कि भविष्य में मेडिकल टूरिज्म की असली सफलता इसी भरोसेमंद अनुभव पर निर्भर करेगी।