Anant Chaturdashi 2026 Vrat Katha: अनंत चतुर्दशी का पर्व इस वर्ष 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। सनातन परंपरा में इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस अवसर पर कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं और पूजा के दौरान अनंत सूत्र धारण करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अनंत चतुर्दशी के दिन व्रत कथा का पाठ या श्रवण करना भी शुभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार, 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी की पूजा के लिए सुबह 6 बजकर 11 मिनट से रात 11 बजकर 6 मिनट तक का समय बताया गया है। इस अवधि में श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं। वहीं, व्रत रखने वाले लोगों के लिए अनंत चतुर्दशी की कथा पढ़ना या सुनना विशेष महत्व रखता है।
सुमंत ब्राह्मण और उनकी पुत्री सुशीला की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में सुमंत नाम के एक ब्राह्मण रहते थे। उनकी पत्नी का नाम दीक्षा था और उनकी एक पुत्री थी, जिसका नाम सुशीला था। सुशीला धार्मिक और संस्कारी स्वभाव की थी। बचपन में ही उसकी मां का निधन हो गया। इसके बाद सुमंत ने कर्कशा नाम की महिला से दूसरा विवाह कर लिया। समय बीतने के साथ सुशीला विवाह योग्य हुई तो उसका विवाह कौंडिन्य ऋषि के साथ कर दिया गया। विदाई के समय जब बेटी और दामाद को कुछ देने की बात आई तो उसकी सौतेली मां ने धन या सामान देने के बजाय ईंट और पत्थर के टुकड़े बांध दिए। इस व्यवहार से कौंडिन्य ऋषि काफी दुखी हुए और वह सुशीला को साथ लेकर अपने आश्रम की ओर चल पड़े।
नदी किनारे सुशीला ने जाना अनंत व्रत का महत्व
रास्ते में शाम हो गई और दोनों एक नदी के किनारे रुक गए। इसी दौरान सुशीला ने कुछ महिलाओं को एक विशेष प्रकार की पूजा करते हुए देखा। जब उसने उनसे इस पूजा के बारे में पूछा तो महिलाओं ने बताया कि वे भगवान अनंत का व्रत और पूजन कर रही हैं। अनंत व्रत के महत्व के बारे में जानने के बाद सुशीला ने भी वहीं विधि-विधान से भगवान अनंत की पूजा की। पूजा पूरी होने के बाद उसने 14 गांठों वाला अनंत सूत्र अपने हाथ में बांध लिया और फिर अपने पति के पास लौट आई। कौंडिन्य ऋषि ने जब उसके हाथ में बंधे सूत्र के बारे में पूछा तो सुशीला ने उन्हें पूरी बात बता दी। हालांकि, ऋषि ने उस सूत्र को भगवान की कृपा का प्रतीक मानने के बजाय उसे निकालकर अग्नि में डाल दिया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान अनंत का अनादर करने के बाद कौंडिन्य ऋषि के जीवन में परेशानियां शुरू हो गईं।
धीरे-धीरे खत्म हो गई सारी संपत्ति
कथा के अनुसार, अनंत सूत्र के अपमान के बाद कौंडिन्य ऋषि की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी। धीरे-धीरे उनकी सारी संपत्ति समाप्त हो गई और परिवार को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। एक दिन ऋषि ने सुशीला से इस स्थिति का कारण पूछा। तब सुशीला ने उन्हें बताया कि अनंत सूत्र का अपमान करने के कारण भगवान अनंत उनसे नाराज हुए हैं। अपनी भूल का एहसास होने के बाद कौंडिन्य ऋषि भगवान अनंत की तलाश में वन की ओर निकल पड़े।
तपस्या के बाद भगवान अनंत ने दिए दर्शन
काफी समय तक भगवान अनंत को खोजने के बावजूद जब ऋषि को उनके दर्शन नहीं हुए तो वह निराश और व्याकुल हो गए। अंततः भगवान अनंत उनके सामने प्रकट हुए। उन्होंने ऋषि को बताया कि अनंत सूत्र का अपमान करने के कारण ही उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। कौंडिन्य ऋषि के पश्चाताप से प्रसन्न होकर भगवान अनंत ने उन्हें दोबारा व्रत करने का उपाय बताया। कथा के अनुसार, भगवान ने उनसे कहा कि वह घर लौटकर 14 वर्षों तक श्रद्धा और अपनी सामर्थ्य के अनुसार अनंत व्रत का पालन करें। इसके बाद विधि-विधान से व्रत का उद्यापन करने पर उनके कष्ट दूर हो जाएंगे। भगवान की आज्ञा के अनुसार कौंडिन्य ऋषि ने अनंत व्रत का पालन किया। मान्यता है कि व्रत के प्रभाव से उनके जीवन में दोबारा सुख-समृद्धि लौट आई और परेशानियां समाप्त हो गईं।
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युधिष्ठिर ने भी किया था अनंत व्रत
अनंत चतुर्दशी से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में पांडवों का भी उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण के मार्गदर्शन पर युधिष्ठिर ने भगवान अनंत का व्रत किया था। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से पांडवों को कठिन परिस्थितियों में भगवान का आशीर्वाद मिला और महाभारत के युद्ध में उन्हें विजय प्राप्त हुई। इसी वजह से अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा, व्रत कथा का पाठ और अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है।