
बिहार की सियासत में छोटे सरकार के नाम से मशहूर अनंत सिंह को बड़ा झटका लगा है. दुलारचंद यादव हत्याकांड में नामजद होने के बाद उन्हें 1 नवंबर की आधी रात बाढ़ से गिरफ्तार किया गया और फिलहाल वे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में हैं. ये वही अनंत सिंह हैं जिन्होंने 2015 में जेल से चुनाव जीतकर इतिहास रचा था, लेकिन इस बार हालात बहुत अलग हैं क्योंकि मोकामा का चुनाव अब सिर्फ जीत का नहीं, बल्कि इज़्ज़त और साख का सवाल बन गया है. मोकामा में 30 अक्टूबर को जन सुराज और जेडीयू समर्थकों की भिड़ंत के दौरान दुलारचंद यादव की हत्या ने पूरे बिहार का सियासी तापमान बढ़ा दिया है. पुलिस ने अब तक 81 गिरफ्तारियां की हैं, जिनमें अनंत सिंह के करीबी मणिकांत ठाकुर और रणजीत राम भी शामिल हैं.
आलाकमान का मैसेज और सरेंडर की कहानी
सियासी गलियारों में चर्चा है कि अनंत सिंह की गिरफ्तारी कोई अचानक फैसला नहीं थी, बल्कि इस पर जेडीयू आलाकमान की मंजूरी पहले से थी. सूत्र बताते हैं कि पार्टी नेतृत्व ने पहले ही अनंत सिंह को मैसेज भेजा था कि कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें. इसी संदेश के बाद उन्होंने 2 नवंबर को सरेंडर करने की योजना बनाई थी और 1 नवंबर को आखिरी बार मोकामा में प्रचार रैली भी की लेकिन पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा की टीम ने सरेंडर से कुछ घंटे पहले ही कार्रवाई कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया.
मोकामा की जातीय सियासत में बदलते समीकरण
मोकामा की राजनीति जातीय गणित पर टिकी है यहां भूमिहार 30%, यादव 20% और दलित-अतिपिछड़ा वोटर करीब 40% हैं. अनंत सिंह भूमिहार समाज से हैं और उन्हीं वोटों पर उनकी मजबूत पकड़ है. लेकिन इस बार उनका मुकाबला भूमिहार नेता सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी और जन सुराज के पीयूष प्रियदर्शी से है. दुलारचंद की हत्या के बाद यादव और ओबीसी वोट आरजेडी की ओर झुकते दिख रहे हैं, वहीं अगड़ा बनाम पिछड़ा की हवा ने भूमिहार वोटों को फिर अनंत सिंह की ओर सिमटने का मौका दिया है.
तेजस्वी की रणनीति और आगे का खेल
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अब मोकामा की जंग तीन मोर्चों पर जातीय, भावनात्मक और सियासी नैरेटिव लड़ी जा रही है. तेजस्वी यादव की टीम यादव और ओबीसी वोटों को एकजुट करने की कोशिश में है, ताकि जंगलराज वाले एनडीए नैरेटिव को पलटा जा सके. उधर, जेडीयू खुद को कानून और सिस्टम वाली पार्टी बताकर संदेश देना चाहती है लेकिन असली बात ये है कि अनंत सिंह जेल में हों या बाहर, मोकामा में नाम अभी भी उन्हीं का गूंजता है उन्होंने गिरफ्तारी के बाद लिखा सत्यमेव जयते, मुझे मोकामा की जनता पर भरोसा है, अब चुनाव जनता लड़ेगी. अब देखना होगा कि क्या ये भरोसा छोटे सरकार को एक बार फिर जेल से जीत की राह दिखाएगा या इस बार सियासी खेल वाकई बदल चुका है.