बिहार की राजनीति में दबदबे और बाहुबली छवि के लिए पहचाने जाने वाले जदयू विधायक अनंत सिंह को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। पटना की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल अनंत सिंह जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। वे अभी भी पटना की बेऊर जेल में बंद रहेंगे। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया, जिससे उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
चुनावी हिंसा से जुड़ा पूरा मामला
यह मामला बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान मोकामा में हुई हिंसक घटना से जुड़ा है। अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में चुनाव प्रचार के दौरान दो गुट आमने-सामने आ गए थे। पहले बहस हुई, फिर मारपीट और फायरिंग शुरू हो गई। इसी दौरान 75 वर्षीय दुलारचंद यादव को गोली लगने की बात सामने आई। बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि गोली मारने के बाद गाड़ी चढ़ाकर उनकी हत्या की गई। इस घटना के बाद अनंत सिंह पर मुख्य आरोप लगे।
गिरफ्तारी के बाद भी चुनावी जीत
घटना के कुछ दिन बाद 2 नवंबर को पुलिस ने अनंत सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हैरानी की बात यह रही कि जेल में रहते हुए भी उन्होंने मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। चुनावी नतीजों में उन्होंने जीत दर्ज की और छठी बार विधायक बनने का रिकॉर्ड बनाया। हालांकि जेल में बंद होने के कारण वे अब तक न तो शपथ ले पाए हैं और न ही विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हो सके हैं। उनकी जीत ने मोकामा की राजनीति में उनके प्रभाव को जरूर दिखाया, लेकिन कानूनी अड़चनें बनी हुई हैं।
इसे भी पढे़ं : Delhi में 'तंदूरी रोटी' खाने वालों को झटका, सरकार ने बदल दिया खाने का नियम, पढ़ें क्या हुआ ?
आगे क्या रहेगा अनंत सिंह का रास्ता
एमपी-एमएलए कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद अनंत सिंह की राह और कठिन हो गई है। कोर्ट का मानना है कि मामला गंभीर है और जांच अभी जारी है। इसी वजह से राहत देना सही नहीं होगा। अब उनके वकीलों की ओर से हाईकोर्ट में अपील की तैयारी की जा रही है। जब तक उच्च अदालत से कोई राहत नहीं मिलती, तब तक अनंत सिंह को जेल में ही रहना होगा। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अगला मोड़ जांच और अदालत के अगले आदेश पर टिका है।