बिहार की राजनीति में मोकामा के विधायक अनंत सिंह का नाम हमेशा चर्चा में रहता है। हाल ही में उनके एक बयान ने फिर से राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। राज्यसभा चुनाव के दौरान वोट डालने पहुंचे अनंत सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अब वह खुद चुनाव नहीं लड़ना चाहते। उनके इस बयान के बाद पटना से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है। कई नेताओं और समर्थकों के लिए यह बयान काफी चौंकाने वाला माना जा रहा है।
वोट डालने पहुंचे और दिया बयान
राज्यसभा चुनाव के दौरान अनंत सिंह सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान करने पहुंचे थे। वोट डालने के बाद जब पत्रकारों ने उनसे सवाल किए तो उन्होंने साफ कहा कि अब वह खुद चुनाव लड़ने की योजना नहीं बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगे की राजनीति अब उनके बच्चे करेंगे और वही चुनावी मैदान में उतरेंगे। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में अलग अलग तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मुख्यमंत्री और गठबंधन पर भी बोले
मीडिया से बातचीत के दौरान अनंत सिंह ने मुख्यमंत्री के काम की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि राज्य में गठबंधन मजबूत है और आने वाले समय में भी इसमें कोई दिक्कत नहीं होगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्यसभा चुनाव में एनडीए के सभी उम्मीदवार जीत दर्ज करेंगे। उनके इस बयान को राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री पद पर दिया नया संकेत
अनंत सिंह ने मुख्यमंत्री पद को लेकर भी एक दिलचस्प टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि निशांत कुमार में मुख्यमंत्री बनने के सभी गुण मौजूद हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा इसका फैसला बड़े नेता ही करेंगे। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
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लंबा रहा है राजनीतिक सफर
अगर अनंत सिंह के राजनीतिक करियर की बात करें तो वह कई सालों से बिहार की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने 2005 में पहली बार मोकामा से विधानसभा चुनाव जीतकर अपनी पहचान बनाई थी। इसके बाद वह कई बार विधायक बने। कई चुनाव उन्होंने अलग अलग दलों के टिकट पर या स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में भी जीते हैं। हाल ही में 2025 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने जीत दर्ज की थी।
फिलहाल जेल में हैं विधायक
वर्तमान में अनंत सिंह एक मामले में जेल में बंद हैं। उन पर एक हत्या मामले में शामिल होने का आरोप है और इसी मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा है और उनकी जमानत याचिका भी खारिज हो चुकी है। अब इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी की जा रही है। ऐसे समय में उनका चुनाव न लड़ने वाला बयान बिहार की राजनीति में बड़ी चर्चा का विषय बन गया है।