पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कोच संजय बांगर की बेटी अनाया बांगर ने हाल ही में अपनी जेंडर-चेंज कराने की यात्रा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है. 2 जुलाई को उन्होंने ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन और Tracheal Shave के दो सर्जरी सफलतापूर्वक कराए, जिसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा की. ऑपरेशन से पहले उन्होंने गर्व और संवेदनशीलता से भरा एक भावुक वीडियो शेयर किया, जिसमें सिसकते हुए उन्होंने अपनी पहचान और इस यात्रा की गहराई को जाहिर किया कि “मेरी पहचान… मेरा सच”
ऑपरेशन से पहले भावुक लम्हे
अनाया ने इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर 7 मिनट का एक वीडियो साझा किया, जिसमें वो अपने ऑपरेशन से पहले की भावनाओं को व्यक्त करती दिखीं. उन्होंने बताया कि उन्हें किस अंग की सर्जरी करवानी है और अपनी ट्रांसफॉर्मेशन की अनगिनत यादों को याद किया, जिससे उनकी आंखों में आंसू भर आए. वीडियो में सिसकती आवाज़ में वो कहती दिखीं, "यह मेरा सच है... मेरी पहचान..."इस दौरान पल भर के लिए खामोश रुकना उनका आंतरिक दर्द बयां करता है .
कौन-सी सर्जरी हुई?
1. ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन– स्तनों को आकार देने के लिए इम्प्लांट्स लगाए गए, जिससे उनकी शारीरिक रूप-रंग और आत्मविश्वास में वृद्धि हो.
2. Tracheal Shave – गले की हड्डी को सौम्य और सुडौल बनाने की प्रक्रिया, जो एक सिस्टेमेटिक जेंडर-एफर्मिंग सर्जरी का हिस्सा है.
लड़के से लड़की बनने में कितना खर्च होता है?
रिपोर्ट्स के आधार पर अनाया की पूरी ट्रांसफार्मेशन प्रक्रिया में लगभग ₹1 करोड़ तक की लागत आ सकती है. नवीनतम ऑपरेशन में ₹10 लाख तक का खर्च हो सकता है.अकेले ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन की लागत लगभग ₹3.5 लाख, जबकि Tracheal Shave के लिए ₹2.5–6.5 लाख तक खर्चा हो सकता है.
‘मेरा शरीर, मेरा चुनाव...’
साथ ही उन्होंने शब्दों में उन्होंने लिखा कि “सालों के इंतज़ार, लड़ाई और सपनों के बाद… अंततः मैंने यह अपने लिए किया.” “मेरी सच्चाई” — ये न सिर्फ एक सर्जरी का जश्न था, बल्कि आत्म-स्वीकृति की एक जोरदार पुकार भी थी.
समानता और आत्मीयता की तलाश कर रहे लोगों के लिए प्रेरणा
उनका यह कदम न केवल एक व्यक्तिगत बदलाव था, बल्कि उस समुदाय के लिए भी एक मिसाल—जो समानता और आत्मीयता की तलाश में है. उनका संघर्ष, उनकी फाइनेंशियल तैयारी, दर्द और जीत यह सब दिखाता है कि कब और कैसे सच्चाई ज़िंदगी बदल देती है.
पार किया मील का पत्थर
अनाया बांगर ने अपने सफर में एक और मील का पत्थर पार किया है. जहां ऑपरेशन के दर्द के बीच एक भावनात्मक रूप भी रहा. यह सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मनोबल, सशक्तिकरण और आत्म-स्वीकृति की ओर कदम है. उनका यह आत्मविश्वास ‘मेरा शरीर, मेरा चुनाव, मेरी सच्चाई’—आज बहुतों के लिए प्रेरणा बन चुका है.