LGBTQ+ Gender Identity--पूर्व क्रिकेटर संजय बांगड़ के बेटे आर्यन बांगड़, जो अब अनाया बांगड़ के नाम से अपनी पहचान के साथ जीवन जी रही हैं, ने अपने संघर्षों को लेकर एक चौंकाने वाला अनुभव साझा किया है। अनाया का दावा है कि डॉक्यूमेंट्स में नाम और तस्वीर बदलवाने की प्रक्रिया के दौरान उन्हें सरकारी अस्पताल में बेहद असहज स्थिति से गुजरना पड़ा। उनके मुताबिक डॉक्टरों के एक पैनल ने उनसे कपड़े उतारकर शारीरिक जांच कराने को कहा। अनाया ने इस अनुभव को बेहद पीड़ादायक बताया।
पहचान बदलने के बाद शुरू हुआ मुश्किलों का दौर
अनाया बांगड़ ने अपनी पहचान और ट्रांजिशन से जुड़े अनुभव साझा करते हुए बताया कि यह सफर उनके लिए आसान नहीं रहा। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने अपनी सेक्सुअलिटी और जेंडर आइडेंटिटी के बारे में लोगों को बताया तो कई लोग हैरान रह गए। इसके बाद उन्हें ताने सुनने पड़े और लोगों का व्यवहार भी बदल गया। अनाया के मुताबिक कई मौकों पर उन्हें ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जिसने उन्हें भीतर तक परेशान किया। उन्होंने बताया कि एक पार्टी में एक व्यक्ति ने उनके शरीर के निचले हिस्से को देखने की कोशिश की, जबकि एक दोस्त ने भी उनकी प्राइवेसी का उल्लंघन करते हुए उनके शरीर को लेकर सच जानने की कोशिश की। अनाया का कहना है कि इन घटनाओं ने उन्हें यह महसूस कराया कि लोग उनकी पहचान को समझने के बजाय उसे जांचने और परखने की कोशिश करते हैं।
सरकारी अस्पताल में क्या हुआ? अनाया ने सुनाया अनुभव
अनाया के मुताबिक ट्रांसजेंडर पहचान से जुड़े दस्तावेजों में बदलाव की प्रक्रिया के दौरान उन्हें सरकारी अस्पताल जाना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि वहां डॉक्टरों का एक पैनल मौजूद था, जिसमें पुरुष और महिला दोनों डॉक्टर शामिल थे। अनाया का आरोप है कि उनसे कहा गया कि उन्हें अपने पूरे कपड़े उतारने होंगे और यह दिखाना होगा कि वह वास्तव में महिला हैं या नहीं और उनकी सर्जरी सही तरीके से हुई है या नहीं। अनाया ने बताया कि उन्होंने पुरुष डॉक्टरों की मौजूदगी पर आपत्ति जताई और कहा कि वह उनके सामने इस तरह की जांच नहीं कराना चाहतीं, लेकिन कथित तौर पर उन्हें बताया गया कि वेरिफिकेशन के लिए यह जरूरी है। उन्होंने इस अनुभव को बेहद असहज और भावनात्मक रूप से परेशान करने वाला बताया।
‘सबके सामने किया गया टेस्ट’, अनुभव बताते हुए भावुक हुईं अनाया
अनाया ने दावा किया कि जांच के दौरान उन्हें ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा, जिसने उन्हें मानसिक रूप से झकझोर दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने डॉक्टरों से अपनी निजता को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन इसके बावजूद कथित तौर पर उनकी शारीरिक जांच की गई। अपने अनुभव के बारे में बताते हुए अनाया भावुक भी हो गईं। उनका कहना है कि उस समय उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि इस तरह की प्रक्रिया कानूनी रूप से सही है या नहीं। बाद में जब उन्होंने अपने अनुभव से जुड़ा वीडियो साझा किया और इस बारे में जानकारी हासिल की, तब उन्हें कथित तौर पर पता चला कि उनके साथ किया गया व्यवहार गैर-कानूनी हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अस्पताल या डॉक्टरों की ओर से कोई प्रतिक्रिया इस इनपुट में सामने नहीं आई है।
दस्तावेजों में पुराना नाम, हर जगह पहचान को लेकर सवाल
अनाया की परेशानी केवल अस्पताल में हुए कथित अनुभव तक सीमित नहीं है। उन्होंने बताया कि उनके कई दस्तावेजों पर आज भी उनकी पुरानी तस्वीर और पुराना नाम दर्ज है। ऐसे में जब वह किसी जगह जाती हैं तो लोग उनकी पहचान को लेकर सवाल करने लगते हैं। अनाया के मुताबिक उन्हें डर रहता है कि कहीं किसी मुश्किल परिस्थिति में फंसने पर उनके दस्तावेज उनकी मौजूदा पहचान से मेल नहीं खाए तो स्थिति और खराब हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस डर ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित किया है और उन्होंने कई जगहों पर जाना तक कम कर दिया है। उनका कहना है कि पहचान से जुड़े दस्तावेजों में बदलाव की प्रक्रिया आसान और सम्मानजनक होनी चाहिए, ताकि किसी व्यक्ति को अपनी पहचान साबित करने के लिए अपमानजनक या असहज परिस्थितियों से न गुजरना पड़े।
पहचान और सम्मान का सवाल, अनाया की कहानी ने खड़े किए सवाल
अनाया बांगड़ का अनुभव केवल उनकी निजी जिंदगी की मुश्किलों की कहानी नहीं है, बल्कि यह पहचान, निजता और सम्मान से जुड़े बड़े सवाल भी सामने रखता है। किसी भी व्यक्ति की मेडिकल और व्यक्तिगत जानकारी संवेदनशील होती है और उसकी जांच के दौरान निजता और गरिमा का ध्यान रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। अनाया ने अपने अनुभव को सार्वजनिक करते हुए बताया कि उन्हें किस तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ा। हालांकि उनके लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस इनपुट में नहीं है और संबंधित अस्पताल या डॉक्टरों का पक्ष भी सामने नहीं आया है। ऐसे में पूरा मामला उनके दावों के आधार पर ही देखा जाना चाहिए। लेकिन उनकी बात ने ट्रांसजेंडर लोगों के लिए दस्तावेज बदलने की प्रक्रिया, मेडिकल वेरिफिकेशन और निजी गरिमा से जुड़े सवालों को जरूर सामने ला दिया है।