आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी में दूध में मिलावट से प्रभावित 15 लोग अभी भी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। दूध में मिलावट की इस घटना में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 15 लोग बीमार हैं और अलग-अलग छह अस्पतालों में उनका इलाज चल रहा है। इलाज करा रहे लोगों में एक मरीज वेंटिलेटर पर है, छह मरीज डायलिसिस पर हैं और आठ मरीज वेंटिलेटर व डायलिसिस दोनों पर हैं।
अधिकारियों को निगरानी के लिए तैनात किया
गुरुवार को सरकार ने इस घटना की पूरी जानकारी दी, जिससे पहले काफी हंगामा हुआ था। एक आधिकारिक नोट में विभिन्न विभागों द्वारा उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। स्वास्थ्य आयुक्त और खाद्य सुरक्षा निदेशक सहित वरिष्ठ अधिकारियों को निगरानी के लिए तैनात किया गया है।
तीन मृतक 70 वर्ष से अधिक आयु के थे
लैब की रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पहला मरीज 16 फरवरी को अस्पताल में भर्ती हुआ था। 24 फरवरी तक कुल 20 लोगों को भर्ती किया गया, जिनमें से पांच की मौत हो चुकी है। मरने वालों में एक छह साल का बच्चा भी शामिल है। तीन मृतक 70 वर्ष से अधिक आयु के थे।
जहरीले पदार्थ के संपर्क में आने की ओर इशारा
22 फरवरी को पूर्वी गोदावरी के जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को किम्स अस्पताल से सूचना मिली थी कि कई बुजुर्ग मरीज पेशाब न आना, उल्टी, पेट दर्द और गंभीर किडनी खराब होने जैसी समस्या के साथ भर्ती हुए हैं, जिन्हें डायलिसिस की जरूरत पड़ी। जांच में पाया गया कि मरीजों के खून में यूरिया और सीरम क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ा हुआ था, जो जहरीले पदार्थ के संपर्क में आने की ओर इशारा करता है।
घर-घर सर्वे कराया गया
प्रारंभिक जांच में दूध के सेवन को इस बीमारी का संभावित कारण माना गया। अधिकारियों ने पाया कि कोरुकोंडा मंडल के नरसापुरम गांव स्थित वरलक्ष्मी मिल्क डेयरी से 106 परिवारों को दूध की सप्लाई की गई थी। इस डेयरी से दूध की सप्लाई तुरंत रोक दी गई। 25 फरवरी को घर-घर सर्वे कराया गया।