अनिल अंबानी से जुड़े बड़े बैंक फ्रॉड मामले में अब जांच तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश के बाद प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने अनिल धीरूभाई अंबानी समूह और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ जांच के लिए एक विशेष जांच टीम बनाई है। अदालत ने साफ कहा था कि मामले की निष्पक्ष और तेज जांच होनी चाहिए। इसी आदेश के बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है।
40000 करोड़ रुपये के लेनदेन की पड़ताल
जांच का दायरा करीब 40000 करोड़ रुपये के कथित बैंक लोन फ्रॉड से जुड़ा है। आरोप है कि विभिन्न बैंकों से लिए गए कर्ज को शेल कंपनियों के जरिए इधर-उधर किया गया। इसी मामले में Anil Ambani और उनके समूह की भूमिका जांच के घेरे में है। लंबे समय से चल रही जांच में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई थी।
टीना अंबानी से पूछताछ की तैयारी
इसी सिलसिले में अनिल अंबानी की पत्नी Tina Ambani को दिल्ली स्थित ED मुख्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। हालांकि वह उस दिन पेश नहीं हुईं। अब संभावना है कि उन्हें दोबारा तलब किया जाए। पूछताछ का मकसद न्यूयॉर्क के मैनहट्टन इलाके में करीब 70 करोड़ रुपये के एक फ्लैट की खरीद से जुड़े पैसों का हिसाब समझना है।
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करीबी सहयोगी की गिरफ्तारी से खुला राज
इस मामले में पिछले हफ्ते अनिल अंबानी के करीबी माने जाने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी की गिरफ्तारी हुई थी। हिरासत में पूछताछ के दौरान उसी अधिकारी ने टीना अंबानी का नाम लिया था। इसके बाद जांच एजेंसी ने लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों और विदेशी संपत्तियों पर ध्यान केंद्रित किया है। इसी कड़ी में विदेशी निवेश और संपत्ति खरीद की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
CBI और ED दोनों की कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने 4 फरवरी को साफ कहा था कि इस बैंक फ्रॉड से जुड़े अलग-अलग मामलों में जांच एजेंसियां मुकदमे दर्ज करें। इसके बाद सीबीआई और ED दोनों ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। बताया जा रहा है कि अलग-अलग वित्तीय संस्थानों से लिए गए 20 से ज्यादा कर्ज मामलों की अलग-अलग जांच होगी। यानी आने वाले दिनों में केसों की संख्या और बढ़ सकती है।
शेल कंपनियों का बड़ा जाल सामने
ED की जांच में शेल कंपनियों का एक बड़ा नेटवर्क सामने आया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, मैनहट्टन के फ्लैट की बिक्री से मिले करीब 8.3 मिलियन डॉलर भी इसी नेटवर्क के जरिए इधर-उधर किए गए। यह पैसा दुबई की एक कंपनी के रास्ते अमेरिका भेजा गया, जिसे नकली निवेश के रूप में दिखाया गया। अब जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क को जोड़कर मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं।