देश के चर्चित कारोबारी अनिल अंबानी एक बार फिर कानूनी घेरे में हैं। बैंकों से लिए गए हजारों करोड़ के कर्ज की कथित हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 26 फरवरी को वे दिल्ली स्थित प्रवर्तन निदेशालय के दफ्तर पहुंचे। उन पर लोन डायवर्जन और विदेशी मुद्रा नियमों के उल्लंघन के आरोप हैं। एक दिन पहले ही मुंबई स्थित उनके आलीशान बंगले ‘अबोड’ को कुर्क किए जाने से मामला और सुर्खियों में आ गया है।
दूसरे दौर की पूछताछ, क्या हैं आरोप?
अनिल अंबानी रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दूसरे चरण की पूछताछ के लिए ED दफ्तर पहुंचे। आरोप है कि उनकी कंपनियों ने सरकारी और विदेशी बैंकों से लिए गए कर्ज का गलत इस्तेमाल किया और फंड डायवर्जन किया।
यह जांच 2019 में दर्ज सीबीआई की एफआईआर के आधार पर आगे बढ़ी। अगस्त 2025 में भी उनसे इसी मामले में पूछताछ की गई थी। अब जांच एजेंसी उनके बयानों और दस्तावेजों का मिलान कर रही है।
‘अबोड’ क्यों हुआ कुर्क?
मुंबई के पॉश पाली हिल इलाके में स्थित 17 मंजिला बंगला ‘अबोड’ भी जांच के दायरे में आ गया है। इस प्रॉपर्टी की अनुमानित कीमत ₹3,716 करोड़ बताई गई है।
प्रवर्तन निदेशालय ने इसे ‘प्रोविजनल अटैचमेंट’ के तहत अस्थायी रूप से कुर्क किया है। इससे पहले नवंबर 2025 में इसी इमारत के एक हिस्से, जिसकी कीमत 473.17 करोड़ थी, को भी अटैच किया गया था। अब पूरी इमारत को जांच के दायरे में ले लिया गया है।
प्रोविजनल अटैचमेंट’ और PMLA क्या कहते हैं?
‘प्रोविजनल अटैचमेंट’ का अर्थ है कि संबंधित संपत्ति को कानूनी रूप से फ्रीज कर दिया जाता है ताकि उसे बेचा या ट्रांसफर न किया जा सके। अगर अदालत में आरोप साबित हो जाते हैं, तो संपत्ति स्थायी रूप से जब्त की जा सकती है।
यह कार्रवाई Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत की जा रही है। अब तक इस केस में लगभग ₹15,700 करोड़ की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं।
40,185 करोड़ का बकाया और आगे की राह
जांच एजेंसी के अनुसार, रिलायंस कम्युनिकेशंस और उसकी समूह कंपनियों पर देशी-विदेशी बैंकों का कुल 40,185 करोड़ बकाया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) के खिलाफ विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया, जिससे जांच में तेजी आई है।
यह स्पष्ट किया गया है कि उनके बड़े भाई Mukesh Ambani का इस मामले से कोई संबंध नहीं है, क्योंकि दोनों का कारोबारी साम्राज्य लगभग 20 वर्ष पहले अलग हो चुका है।
आने वाले समय में यदि जांच में ठोस सबूत मिलते हैं, तो गिरफ्तारी या नई चार्जशीट दाखिल होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।