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Anil Ambani: रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) और उसके पूर्व निदेशक अनिल अंबानी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के बाद अब सरकारी क्षेत्र के बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) ने भी कंपनी के ऋण खाते को धोखाधड़ी वाला घोषित कर दिया है। बैंक ने आरोप लगाया कि अगस्त 2016 में आरकॉम को दिए गए 700 करोड़ रुपये के ऋण का दुरुपयोग किया गया। नियामकीय जानकारी के अनुसार, स्वीकृत राशि का एक बड़ा हिस्सा गलत तरीके से सावधि जमा में निवेश कर दिया गया, जबकि यह ऋण केवल परिचालन खर्च और देनदारियों के भुगतान के लिए स्वीकृत था।
सीबीआई की जांच और एसबीआई की शिकायत
इससे पहले जून 2024 में एसबीआई ने भी आरकॉम के खाते को फर्जीवाड़े की श्रेणी में रखा था और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बैंक ने आरोप लगाया कि ऋण शर्तों का उल्लंघन कर धन का दुरुपयोग किया गया, जिससे 2,929 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके बाद सीबीआई ने मुंबई और दिल्ली में रिलायंस समूह के परिसरों और अनिल अंबानी के आवास से जुड़े ठिकानों पर तलाशी ली थी। जांच एजेंसियां अब दोनों बैंकों की शिकायतों को मिलाकर आगे की कार्रवाई कर रही हैं।
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अंबानी का पक्ष और कानूनी असर
अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला लगभग दस साल पुराना है और उस समय अंबानी कंपनी के दैनिक संचालन में सक्रिय नहीं थे। प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि एसबीआई पहले ही पांच अन्य गैर-कार्यकारी निदेशकों के खिलाफ कार्रवाई वापस ले चुका है, लेकिन अंबानी को चुनिंदा रूप से निशाना बनाया जा रहा है। बैंकिंग नियमों के अनुसार, किसी खाते को धोखाधड़ी वाला घोषित किए जाने के बाद न केवल प्रवर्तन एजेंसियों को आपराधिक जांच के लिए मामला सौंपा जाता है, बल्कि संबंधित उधारकर्ता को पांच साल तक किसी भी नए ऋण या वित्तीय सुविधा से भी वंचित कर दिया जाता है। ऐसे में आरकॉम विवाद और अंबानी की कानूनी जंग दोनों और गहराने की संभावना है।