
अगर आप उत्तर प्रदेश के किसान हैं तो ये खबर आपके बहुत काम की है. क्योंकि यूपी की योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के धान किसानों को गंगा स्नान से पहले खास तोहफा दिया है. जी हां इस बार के खरीफ सत्र में नॉन-हाईब्रिड धान कुटाई पर एक प्रतिशत रिकवरी की छूट मिलेगी। सरकार के इस फैसले से 13 से 15 लाख किसानों और दो हजार से अधिक राईस मिलों को सीधा लाभ मिलेगा। यह जानकारी मंगलवार की सुबह यहां लोकभवन में हुई प्रेसवार्ता में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने दी। उन्होंने बताया कि इस छूट से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, सरकारी खरीद की प्रक्रिया और तेज होगी। वित्त मंत्री ने बताया कि इस फैसले के बाद राज्य की राईसल मिलों को प्रदेश सरकार 167 करोड रुपये की क्षतिपूर्ति देगी। प्रदेश में दो लाख रोजगार अवसर मजबूत होंगे। किसानों और मिलर्स को सीधा प्रोत्साहन मिलेगा और निवेश में वृद्धि होगी।
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क्या बोले सुरेश खन्ना?
उन्होंने कहा कि इस निर्णय से से राष्ट्रीय स्तर पर बचत होगी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए बाहर से चावल की रैक मंगाने की जरूरत नहीं पडेगी। बताते चलें किहाइब्रिड धान कुटाई पर पहले से तीन प्रतिशत रिकवरी की छूट मिलेगी। हाइब्रिड धान पर हर वर्ष सरकार द्वारा लगभग 100 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति की जाती है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि राइस मिलों को दी जा रही रिकवरी छूट से सरकारी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़ेंगी। अब मिलर्स अधिक उत्साह के साथ सरकारी खरीद में भागीदारी करेंगे, जिससे किसानों को समय पर भुगतान और अधिक सुविधा मिल सकेगी ..सरकार ने पहले से ही हाइब्रिड धान की कुटाई पर 3 प्रतिशत रिकवरी छूट देने का प्रावधान किया था। अब नॉन-हाइब्रिड धान पर भी यह राहत मिलने से चावल उद्योग को संतुलन और स्थायित्व मिलेगा। यह निर्णय उत्तर प्रदेश को खाद्यान्न उत्पादन और प्रसंस्करण में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
रोजगार का अवसर बढ़ेगा
राज्य सरकार का अनुमान है कि इस पहल से प्रदेश में लगभग दो लाख रोजगार के अवसर सुदृढ़ होंगे। राइस मिलों की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और राज्य में धान कुटाई का स्थानीय नेटवर्क मजबूत होगा। सरकार का यह कदम न केवल किसानों और मिलर्स को राहत देगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगा।