उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एसीओ) और विजिलेंस विभाग ने पिछले चार वर्षों में बड़ी कार्रवाई की है। आंकड़ों के अनुसार बीते चार सालों में कुल 680 भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी घूस लेते रंगे हाथों पकड़े गए। इनमें सबसे ज्यादा 266 मामले राजस्व विभाग के कर्मचारियों के हैं, जो कुल मामलों का लगभग 39 प्रतिशत है। दूसरे नंबर पर पुलिस विभाग है, जहां 108 कर्मी घूसखोरी में फंसे।
विभागों में शिकायतें सबसे अधिक आती हैं
भ्रष्टाचार निवारण संगठन के अधिकारियों के मुताबिक राजस्व विभाग में लेखपाल, पटवारी और अन्य कर्मी भूमि रिकॉर्ड, दाखिल-खारिज, पैमाइश और नामांतरण जैसे कार्यों में रिश्वत मांगते पाए गए। जनता के रोजमर्रा के संपर्क में आने वाले इन विभागों में शिकायतें सबसे अधिक आती हैं। पुलिस विभाग में भी थाना स्तर पर मामलों के निपटारे या एफआईआर दर्ज करने के बदले घूस लेने के मामले सामने आए। अन्य विभागों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, लोक निर्माण और नगर निकायों से भी कई कर्मी पकड़े गए।
डिजिटलीकरण के बावजूद भ्रष्टाचार बरकरार है
एसीओ के डीआईजी अखिलेश चौरसिया ने बताया कि राज्य में 18 यूनिट्स कार्यरत हैं और हर रोज दर्जनों शिकायतें राजस्व और पुलिस विभाग से संबंधित आती हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत इन मामलों में एफआईआर दर्ज की जाती है। हाल के महीनों में भी कार्रवाई तेज हुई है। उदाहरण के तौर पर अगस्त-सितंबर 2024 में एक महीने में 40 गिरफ्तारियां हुईं, जिनमें 18 राजस्व कर्मी और 10 पुलिसकर्मी शामिल थे। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि जनसेवा से जुड़े विभागों में पारदर्शिता की कमी और डिजिटलीकरण के बावजूद भ्रष्टाचार बरकरार है। सरकार ने ऑनलाइन सेवाएं बढ़ाई हैं, लेकिन ग्रामीण स्तर पर लेखपालों की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि सख्त निगरानी, डिजिटल रिकॉर्ड और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई से इसे रोका जा सकता है। जनता से अपील की गई है कि घूस मांगने की शिकायत एसीओ के हेल्पलाइन या पोर्टल पर करें। यह कार्रवाई प्रदेश में भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन चुनौतियां बाकी हैं।