देश में पेपर लीक के बढ़ते मामलों पर सख्ती के लिए केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' पेश किया। यह संशोधन 2024 के मौजूदा कानून में बदलाव के लिए लाया गया है। इससे पहले सरकार इस संबंध में ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे चुकी थी। हालांकि बिल पेश होते ही विपक्ष ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया, जिसके चलते लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी और प्रस्तावित चर्चा नहीं हो सकी।
क्या होंगे नए प्रावधान?
संशोधित बिल में पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही जांच दो महीने के भीतर पूरी करने की व्यवस्था की गई है। प्रस्ताव के मुताबिक पेपर लीक के दोषियों को कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की सजा हो सकती है। वहीं संगठित तरीके से पेपर लीक कराने वाले गिरोहों के लिए न्यूनतम 7 साल की कैद और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया है।
संसद में क्यों नहीं हो सकी चर्चा?
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में यह विधेयक पेश किया। इस पर करीब 8 से 10 घंटे की चर्चा प्रस्तावित थी, लेकिन विपक्ष के विरोध और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। सरकार ने इस बहस के लिए अपनी युवा सांसदों की टीम को भी तैयार किया था, ताकि बिल के पक्ष में मजबूती से अपनी बात रखी जा सके और विपक्ष के सवालों का जवाब दिया जा सके।
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कौन-कौन रखने वाले थे अपनी बात?
बीजेपी की ओर से बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या को इस विधेयक पर बोलना था। इनके अलावा जेडीयू के लल्लन सिंह, शिवसेना के डॉ. श्रीकांत शिंदे, एनसीपी के सुनील तटकरे, अपना दल की अनुप्रिया पटेल, लोजपा (रामविलास) के अरुण भारती और टीडीपी के लावु श्री कृष्ण देवरायलु समेत कई सांसदों के भी चर्चा में हिस्सा लेने की तैयारी थी। हालांकि सदन की कार्यवाही बाधित होने से बहस आगे नहीं बढ़ सकी।
शिक्षा मंत्रालय में बदले हालात
पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल ली है। सोमवार को वे लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान मौजूद रहे, जहां शिक्षा विभाग से जुड़े कई सवाल उठे। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने मंत्रालय और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के अधिकारियों के साथ कई समीक्षा बैठकें भी की हैं और परीक्षा व्यवस्था में सुधार पर चर्चा की है।
राज्यसभा में भी अहम दिन
लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में भी सोमवार को महत्वपूर्ण विधायी कार्य तय हैं। यहां वंदे मातरम विधेयक पर चर्चा और उसे पारित कराने का प्रयास किया जाएगा। प्रस्तावित विधेयक में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने और सार्वजनिक रूप से उसके अपमान की स्थिति में दंड का प्रावधान शामिल है। ऐसे में संसद के दोनों सदनों में आज कई अहम विधेयकों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज रहने की संभावना है।