एंटी पेपर लीक संशोधन बिल गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया गया, जिस पर करीब सात घंटे तक चर्चा प्रस्तावित है। बिल को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष ने जहां इसे अधूरा बताया, वहीं सरकार इसे परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है।
खरगे ने सरकार पर साधा निशाना
राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि देश के छात्रों और युवाओं के आंदोलन के कारण सरकार को झुकना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि युवाओं की आवाज और विपक्ष के दबाव के चलते सरकार को शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेना पड़ा। खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार ने कुर्सी बचाने के लिए यह फैसला किया और अब उसी दबाव में यह संशोधन बिल लेकर आई है।
'बिल अभी भी अधूरा'
खरगे ने कहा कि विपक्ष इस संशोधन बिल का स्वागत करता है, लेकिन इसमें अभी भी कई कमियां हैं। उनके मुताबिक केवल जुर्माना बढ़ाने, कड़ी सजा, एसटीएफ और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसे प्रावधानों से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी बात परीक्षा प्रणाली को इतना मजबूत बनाना है कि पेपर लीक की घटनाएं ही न हों।
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2024 का मुद्दा उठाया
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि अगर सरकार को मजबूत कानून ही लाना था, तो इसे वर्ष 2024 में क्यों नहीं लाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय विपक्ष की मांगों को नजरअंदाज किया गया क्योंकि सरकार राजनीतिक कारणों से ऐसा नहीं करना चाहती थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार इस तरह के सख्त कानून की मांग करता रहा, लेकिन सरकार ने देर से कदम उठाया।
कविता और समय पर विवाद
बहस के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने छात्रों पर कथित लाठीचार्ज का जिक्र करते हुए कविता भी सुनाई और कहा कि मेहनत करने वाले छात्र परेशान होते रहे, जबकि दोषी बचते रहे। वहीं कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने नेता सदन और नेता प्रतिपक्ष के लिए अलग से बोलने का समय तय करने की मांग उठाई। इस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार की ओर से जवाब दिया।