मुलायम सिंह यादव परिवार की निजी और राजनीतिक हलचल एक बार फिर सुर्खियों में है। प्रतीक यादव और उनकी पत्नी अपर्णा यादव के रिश्ते में आई दरार अब सार्वजनिक हो चुकी है। तलाक के ऐलान और आरोप–प्रत्यारोप के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ वैवाहिक विवाद है या फिर वर्षों से चले आ रहे वैचारिक मतभेदों का नतीजा, जो सपा के भीतर भी कई बार परिवार को असहज कर चुके हैं।
दो दशक पुराना रिश्ता, 2012 में शादी
अपर्णा यादव और प्रतीक यादव का रिश्ता करीब 20 साल पुराना रहा है। दोनों की जान-पहचान लखनऊ के लॉरेटो कॉन्वेंट स्कूल से शुरू हुई। अपर्णा के पिता वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं और मुलायम सिंह यादव से पारिवारिक परिचय पहले से था। करीब आठ साल के रिश्ते के बाद फरवरी 2012 में सैफई में भव्य समारोह के साथ दोनों की शादी हुई। उस समय समाजवादी पार्टी सत्ता में थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनने जा रहे थे।
सपा में रहते हुए भी अलग वैचारिक पहचान
अपर्णा यादव की पहचान शुरू से ही सपा की पारंपरिक लाइन से थोड़ी अलग रही। पार्टी में रहते हुए उन्होंने कई मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी, जिससे मुलायम परिवार कई बार असहज दिखा। जातिगत आरक्षण जैसे संवेदनशील विषयों पर उनके बयान सपा की राजनीति से मेल नहीं खाते थे। यही कारण रहा कि उन्हें अक्सर पार्टी के भीतर “अलग ट्रैक” पर चलने वाली नेता के रूप में देखा गया।
2017 के बाद बढ़ी दूरी
2017 में अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच हुए पारिवारिक–राजनीतिक टकराव के दौरान अपर्णा की स्थिति और जटिल हो गई। उसी दौर में परिवार के भीतर आरोप–प्रत्यारोप सामने आए, जिससे रिश्तों में खटास बढ़ी। लखनऊ कैंट सीट से चुनाव हारने के बाद अपर्णा को लगा कि पार्टी में उनकी भूमिका सीमित की जा रही है। यह असंतोष धीरे-धीरे खुलकर सामने आने लगा।
भाजपा में जाना और नया राजनीतिक मोड़
जनवरी 2022 में अपर्णा यादव ने समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। इस फैसले को परिवार के कई सदस्यों ने निजी तौर पर स्वीकार किया, लेकिन वैचारिक मतभेद और गहरे हो गए। हालांकि पारिवारिक कार्यक्रमों में बच्चों के स्तर पर रिश्ते सामान्य दिखते रहे, जिससे यह संकेत मिलता रहा कि व्यक्तिगत रिश्तों को राजनीति से अलग रखने की कोशिश की जा रही है।
तलाक का ऐलान और पुराने विवादों की गूंज
हालिया घटनाक्रम में प्रतीक यादव द्वारा किए गए सार्वजनिक पोस्ट ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी। आरोपों के साथ मानसिक तनाव की बात सामने आई। जानकार मानते हैं कि यह विवाद अचानक नहीं, बल्कि वर्षों से चले आ रहे वैचारिक और पारिवारिक मतभेदों की परिणति है। अपर्णा यादव का स्वतंत्र राजनीतिक रुख और पारिवारिक असहमति इस कहानी के अहम पहलू रहे हैं।